मुजफ्फरनगर। बुलंदशहर में मुठभेड़ के दौरान पकड़े 50 हजार के इनामी हरेंद्र सिंह का आपराधिक इतिहास है। वह मुजफ्फरनगर दंगे में भी आरोपी हैं। पुलिस को उसकी काफी समय से तलाश थी।
बुलंदशहर के सिकंदराबाद क्षेत्र में शुक्रवार रात मुठभेड़ के दौरान पकड़ा गया हरेंद्र सिंह पुत्र महावीर जिले के भौराकलां थाने के मोहम्मदपुर रायसिंह गांव का रहने वाला है। हरेंद्र के कई खिलाफ विभिन्न थानों में संगीन मामले दर्ज हैं। दंगे के बाद से पुलिस को उसकी सरगर्मी से तलाश थी। हरेंद्र का राजनीति में भी दबदबा है।
वर्तमान में उसकी पत्नी सुमन ग्राम प्रधान है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक हरेंद्र के खिलाफ पहला मामला पांच जून 2003 को भौराकलां थाने में दर्ज हुआ था। सरदार सिंह की हत्या में वह जेल गया था। हालांकि 2005 में वह इस मामले में बरी हो गया।
जनवरी 2008 में उसके खिलाफ जीआरपी करनाल में अपहरण का मामला दर्ज है। वर्ष 2010 में एक मामले में तितावी थाने में उसके खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज
है। 2011 में राजस्थान के हनुमानगढ़ में भी उसके खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया गया था। 2012 में भौराकलां पुलिस ने हरेंद्र पर गुंडा एक्ट लगाया। 2013 के दंगों में वह नामजद हुआ। गांव के जंगल में हुसैनपुर कलां निवासी तीन मुसलिम युवकों की हत्या में भी वह आरोपी है। इसी साल बागपत में भी उसके खिलाफ जानलेवा हमले का मामला दर्ज किया गया था।