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कई लाख रुपये खर्च, मंदिर के गेट का निर्माण अधूरा

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50 लाख खर्च, फिर भी मंदिर के गेट का निर्माण अधूरा
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देवबंद। 50 लाख रुपये खर्च करने के बाद भी नगर पालिका श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर का मुख्य द्वार (मेन गेट) पूरा नहीं करा सकी। पूर्व विधायक शशीबाला पुंडीर ने इस मामले को स्थानीय निकाय विभाग के प्रमुख सचिव के समक्ष उठाया तो शासन ने इसकी जांच जिला प्रशासन को सौंप दी है।
पिछले दिनों लखनऊ में स्थानीय निकाय विभाग के प्रमुख सचिव दीपक कुमार के समक्ष पूर्व विधायक शशीबाला पुंडीर ने शिकायत की कि नगरपालिका ने श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर के मुख्य द्वार में 50 लाख रुपये खर्च कर दिए, इसके बाद भी मंदिर का द्वार का निर्माण अभी अधूरा है। अब फिर से 43 लाख रुपये का स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया। एक गेट में इतनी मोटी खर्च कराने की उन्होंने जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि इसमें भारी स्तर पर घोटाला हुआ है। शशीबाला ने बताया कि प्रमुख सचिव ने जिला प्रशासन को इस मामले की जांच कराने को आदेशित किया गया कि नगर पालिका के दो कर्मचारियों को साथ लेकर जांच कराई जाए।
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अभी उनके पास शासन से नहीं पहुंची जांच
अभी उनके पास कोई जांच नहीं पहुंची है। आदेश की प्रति मिलते ही नियमानुसार जांच कराकर शासन को भेजी जाएगी। - राकेश कुमार सिंह, कार्यवाहक ईओ पालिका, एसडीएम देवबंद।
डीएम स्वयं संज्ञान लेकर कराएं मंदिर निर्माण मामले की जांच
मंदिर के गेट के निर्माण में घोटाले की बू आ रही है। डीएम से इस मामले को स्वयं संज्ञान लेकर जांच कराने की मांग की गई है। यदि मंदिर के मुख्य द्वार का निर्माण शीघ्र पूरा नहीं किया तो वह भूख हड़ताल करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। - गजराज सिंह राणा, पूर्व नगराध्यक्ष भाजपा एवं नामित पालिका सदस्य देवबंद।
तीन साल बाद भी गेट का निर्माण पूरा न होना दुर्भाग्यपूर्ण
तत्कालीन पालिकाध्यक्ष ने मंदिर के मुख्य गेट को तोड़ा था। तीन साल बाद भी गेट का निर्माण पूरा नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। मंदिर के द्वार के निर्माण में कहां खर्च हुए कई लाख रुपये प्रशासन इसकी जांच कराए। - विकास त्यागी, प्रांत संयोजक बजरंग दल।
लॉकडाउन के कारण बोर्ड फंड में जमा नहीं हुआ पैसा
मंदिर के द्वार का जब स्टीमेट बनाया, तब उसमें जीएसटी शामिल नहीं थी। बाद में करीब 10 लाख रुपये की जीएसटी लगी। इसी दौरान करीब 40 लाख रुपये का काम बढ़ गया। इसे पालिका बोर्ड से पास कराया, लेकिन मार्च माह में लॉकडाउन लगने के बाद पालिका की आमदनी नहीं हो पाई। ठेकेदार भी पैसे मांग रहा है। तीन-चार करोड़ रुपये टैक्स के लोगों पर बकाया हैं, लॉकडाउन के कारण लोगों पर दबाव नहीं बनाया जा रहा है। यही वजह है कि मंदिर के द्वार का निर्माण अधूरा पड़ा है। - जियाउद्दीन अंसारी, अध्यक्ष नगर पालिका देवबंद।
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देवबंद के गेट घोटाले वाली खबर का जोड़
देर शाम प्राप्त हुई है शासन की रिपोर्ट : एसडीएम
देवबंद। एसडीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि मंदिर गेट के निर्माण में शासन द्वारा जिला प्रशासन को भेजी गई रिपोर्ट बुधवार की देर शाम प्राप्त हुई है। इस मामले में नगरपालिका के अधिकारियों को साथ लेकर जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी मिलेगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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