अपने जीवन में मिठास पैदा करें : दिव्यमति
खतौली। दिगंबर जैन चंद्रप्रभु मंदिर सराफान में आर्यिका दिव्यमति माता ने अपने प्रवचन में जीवन जीने की कला के बारे में प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हमारे जन्म की खुशी में बढ़ने वाली मिठाई से शुरू हुई, हमारी जिंदगी की यह यात्रा हमारे ही श्राद्ध की खीर बटने से पहले खत्म हो जाती है। इन दोनों ही मौकों पर अपने जीवन की इस मिठास के स्वाद को आनंद हम स्वयं नहीं ले पाते।
मिठाई का आनंद तो हमारे लिए है नहीं, तो आखिर हमें चाहिए क्या। अपार धन दौलत, प्रसिद्धि, ऐश्वर्य या संतुष्टि, मन की शांति। कुछ चाहिए भी या नहीं। सभी को सब कुछ कदापि नहीं मिलता, तो किसी तृष्णा में जीकर इस जीवन को व्यर्थ करने का क्या औचित्य। केवल कुछ ही दिनों में हमें भूलकर बिना हमारे अपने जीवन में व्यस्त हो जाने वाली यह दुनिया हमें नहीं, बल्कि परिवार, समाज, देश और विश्व को हमारे किसी योगदान के लिए ही याद करेगी। तो क्यों न हम अपने को उस गन्ने के जैसा मीठा बनाएं, जिसका स्वाद हर कोई ले सके। उन्होंने कहा कि आप अपने जीवन में मिठास पैदा करें। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अरुण जैन, योगेश जैन, शीलचंद जैन, सुशील जैन, राजीव, कुलदीप, मुकुल, सुबोध जैन, सुरेंद्र जैन, मनीष, संदीप, नीरज जैन, विवेक जैन, पारस जैन आदि उपस्थित रहे।