फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जून से जिला अस्पताल में होने लगेगा सीटी स्कैन 

Fri, 03 Mar 2017 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
विज्ञापन
सीटी स्कैन मशीन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
जिले को नई सौगात मिली है। शासन ने जिला चिकित्सालय में सीटी स्कैन यूनिट खोलने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए अस्पताल से जगह और अन्य दस्तावेजों की मांग की गई है। जिसे अस्पताल प्रशासन ने पूरा कर शासन को भिजवा दिया है। चुनावी प्रक्रिया निपटने के बाद अस्पताल में यूनिट लगाने का कार्य शुरू किया जाएगा।        
विज्ञापन

    
अब तक सीटी स्कैन के लिए मुजफ्फरनगर, शामली आदि क्षेत्रों के मरीजों को मेरठ और दिल्ली की दौड़ लगानी पड़ती है। यात्रा से लेकर सीटी स्कैन का खर्च मरीज पर बोझ बढ़ाता है। ऐसे में आने-जाने में ही मरीज की हालत बिगड़ जाती है। जिले में आबादी बढ़ने के साथ ही अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। औसत अनुरूप अस्पताल में छोटी-बड़ी बीमारियों के करीब 250 से अधिक मरीज पहुंचते हैं।

इनमें कई को गंभीर बीमारियों के चलते चिकित्सकों को सीटी स्कैन, एमआरआई आदि की जांच तक करानी पड़ती है। इसी को देखते हुए जिला अस्पताल प्रशासन ने सीटी स्कैन की यूनिट लगाने के लिए शासन से मंजूरी मांगी थी। शासन ने मंजूरी देकर जिले को नई सौगात दे दी। पूर्व सीएमओ डॉ एसके जैन ने जिला चिकित्सालय में सीटी स्कैन यूनिट लगाने के लिए जगह चिन्हित कर उसका रिकार्ड शासन भेज दिया था। जिला अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के बराबर में सीटी स्कैन मशीन को लगाने का कार्य किया जाएगा।
विज्ञापन


शासन से चुनाव के बाद सीटी स्कैन की मशीन लगाए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यूनिट लगने के बाद जून माह तक मरीजों को अस्पताल में इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा भी बर्न वार्ड में हीमो डायलिसिस यूनिट लगाने के प्रस्ताव भी मंजूरी मिल गई है। दोनों प्रोजेक्ट पर कार्य विधानसभा चुनाव पूर्ण होने के बाद शुरू होंगे। सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने बताया कि प्रोजेक्ट पर क्या चल रहा है, इसकी अभी जानकारी नहीं है। एक मार्च को ही ज्वाइन किया है, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी।             

क्या है सीटी स्कैन            
मुजफ्फरनगर। सीटी स्कैन एक विशेष प्रकार की जांच है। स्कैनर द्वारा शरीर के भीतरी हिस्सों की अलग-अलग कोनों से तस्वीर ली जाती है। जिस कारण मरीज की बीमारी की सटीक जानकारी मिल पाती है। उसके बाद उस हिसाब से चिकित्सकों द्वारा इलाज शुरू किया जाता है। इससे शरीर के हर अंग पेट, छाती, हाथ, पैर इत्यादि के अंदरुनी अंगों की बीमारियों की पहचान करने के लिए किया जाता है।  
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें