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क्रांतिकारियों के कत्ल का गवाह है सूली वाला बाग

Mon, 15 Aug 2016 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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इसी पेड़ पर दी गई थी 500 लोगों को फांसी। - फोटो : अमर उजाला
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पुरकाजी का सूली वाला बाग क्रूर अंग्रेजी हुकूमत और क्रांतिकारियों के कत्ल का गवाह है। यहां अंग्रेज सरकार का हुक्म न मानने पर एक अंग्रेज कलक्टर ने 500 बेगुनाहों को सूली पर लटका दिया था। लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण यह स्थान अपनी पहचान खोता जा रहा है। आजादी की इस वर्षगांठ पर यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस पवित्र स्थान की ओर थोड़ा ध्यान दें, तो शायद यह उन शहीदों के सम्मान में बहुत बड़ी श्रद्धांजलि होगी।
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1857 में पूरा देश आंदोलन की राह पर था। मेरठ से लगी इस आग की लपटें मुजफ्फरनगर तक भी पहुंच चुकी थीं। इस आंदोलन रूपी यज्ञ में पुरकाजी कस्बे ने भी आहुति दी। कस्बे के बुजुर्गों का कहना है कि सूली वाला बाग में करीब पांच सौ पुरुषों और महिलाओं सूली पर चढ़ाकर फांसी दी गई थी। उस कत्लेआम के गवाह बने पेड़ यहां आज भी मौजूद हैं।

बताया जाता है कि 29 मई 1857 को कलक्टर मिस्टर वरफोर्ट की हत्या कर दी गई थी, इसके बाद एक जुलाई को अंग्रेजों ने मिस्टर एडवर्ड को मुजफ्फरनगर का नया कलक्टर बनाया। जिसने क्रांतिकारियों को रोकने के लिए सेना को बुला लिया और मेजर विलियम के नेतृत्व में आई सेना ने जनपद के लोगों पर अत्याचार की सारी सीमाएं पार कर डालीं। सैकड़ों बेगुनाह लोगों को सूली पर लटकाकर मौत के घाट उतार दिया गया। तभी से इस स्थान का नाम सूली वाला बाग पड़ गया। 
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कस्बे के लोगों का कहना है कि क्रांतिकारियों की कत्लगाह बने सूली वाला बाग की हमेशा से उपेक्षा की गई। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने बार-बार आग्रह के बाद भी शहीदों के सम्मान में इस स्थान पर स्मारक नहीं बनवाया। यदि इस स्थान पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियां सूली वाला बाग नाम तो याद रखेंगी, लेकिन इस स्थान को सूली वाला बाग क्यों कहा जाता है उन्हें बात की जानकारी नहीं होगी।
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