यह बदनसीबी है कि कुदरत का खेल। परिवार वालों ने जिस घर से अपनी बेटी को विदा किया उसी घर से उसकी डोली उठाने के लिए बेबस होना पड़ा। यह असहनीय पीड़ा हर शख्स को कुरेद रहा था कि यह मनहूस दिन आज देखने को क्यों विवश होना पड़ा। घर के आंगन से बेटी का शव उठते ही हर किसी की आंखें भर आईं। परिवार वाले फफक फफक कर रो पड़े।
वारदात मंसूरपुर के गांव बोपाड़ा की है। शनिवार की रात करीब 10.30 ग्रामीण अपने घरों में सो रहे थे। किसी भी ग्रामीण को आभास भी नहीं था कि गांव निवासी वेदपाल के घर में क्या हादसा होने वाला है। गोली की आवाज सुनी तो ग्रामीण जाग गए। ग्रामीणों ने वेदपाल के घर जाकर देखा कि खून से लथपथ पूनम की लाश पड़ी थी।
शव को देखकर ग्रामीण सन्न रह गए। मौका ए वारदात पर मृतका की जेठानी प्रतिभा शव के पास बैठी रो रही थी। मृतका के परिजनों के घर वालों को भी घटना की सूचना किसी ने दे दी थी। जानकारी होते ही परिवार के सदस्य पहुंच गए थे। प्रतिभा ने परिजनों को बताया कि पूनम का हत्यारोपी कोई दूसरा नहीं उसका पति विवेक ही है।
घटनाक्रम के संबंध में बुढ़ाना कोतवाली के गांव टांडा माजरा निवासी कृपाल सिंह ने बताया कि सात वर्ष पूर्व उसने अपनी बेटी पूनम का विवाह गांव बोपाड़ा के विवेक के साथ किया था। शादी में गाड़ी के अलावा भरपूर दान दहेज देकर बेटी पूनम की डोली को विदा किया था।
पिता ने बताया कि पूनम को सात साल बाद भी कोई औलाद नहीं हुई, जिसको लेकर पति, सास व ससुर तथा जेठ पूनम को तंग करते थे। इस बारे में कई बार पूनम ने उसको भी बताया था। इसलिए पति विवेक ने बच्चा नहीं होने पर पूनम की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया।
इसकेबाद, रविवार को पुलिस ने मृतका के पिता को उसका शव सुपुर्द कर दिया था। अभागे पिता ने जिस आंगन से अपनी बेटी की डोली विदा की थी, उस विवाहिता बेटी का शव लेकर उसी आंगन में पहुंचा। गांव टांडा माजरा में विवाहिता का शव पहुंचने पर मायके में कोहराम मच गया। मायके वालों ने गमगीन माहौल में शव का रविवार को अंतिम संस्कार कर दिया।