बसपा प्रत्याशी आरिफ जौला के अपहरण का रहस्य और गहराता जा रहा है। अपहरण के बाद से न परिजनों पर कोई फिरौती की कॉल आई है और न ही पुलिस आरिफ का कोई सुराग लगा पाई है। पुलिस ने आरिफ की बरामदगी को लेकर पूरी ताकत झोंक रखी है, लेकिन चार दिन बाद भी कोई कामयाबी हाथ नहीं लगी। गांव के लोगों का धैर्य जवाब दे रहा है। शुक्रवार को बैठक में शनिवार तक आरिफ की बरामदगी नहीं होने पर रविवार को जौला में महापंचायत का ऐलान किया गया है।
बुढ़ाना क्षेत्र के बसपा प्रत्याशी आरिफ जौला का मंगलवार को उस समय अपहरण कर लिया गया था, जब वह दिल्ली से अपने गांव जौला लौट रहे थे। उनकी स्कॉर्पियो कंकरखेड़ा के डाबका गांव में खड़ी मिली थी। घटना के बाद से पुलिस टीमें मामले की खोजबीन में जुटी हैं, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लग पाया है। पुलिस को यह समझ नहीं आ रहा है कि अगर अपहरण हुआ है तो परिजनों को फिरौती वगैरहा की कोई कॉल आनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
वारदात को जैसे-जैसे समय बीत रहा है, परिजनों और उनके समर्थकों का धैर्य जवाब देता जा रहा है। आरिफ के मुद्दे पर गांव में सभी दलों के लोग एक मंच पर आ गए हैं। शुक्रवार को जौली में जिम्मेदार लोगों की मीटिंग हुई, जिसमें घंटों विचार-विमर्श के बाद शनिवार तक आरिफ की सकुशल बरामदगी नहीं होने पर रविवार को जौला गांव में महापंचायत करने का ऐलान किया गया। मीटिंग में 11 लोगों की कमेटी भी गठित की गई, जिसमें पूर्व प्रधान मुन्ना, आस मोहम्मद, जिला पंचायत सदस्य अब्दुल जब्बार, पूर्व जिला पंचायत सदस्य महबूब लतीफ, रिजवान, गन्ना समिति के चेयरमैन हाजी जमशेद, मौलाना मुनफैत, मुफ्ती आजाद, पप्पू राना, रईस भड़ाना और ताहिर ठेकेदार को रखा गया है।
यह कमेटी आरिफ की बरामदगी को लेकर अधिकारियों से सम्पर्क करेगी और आंदोलन की रणनीति बनाएगी। हाजी जमशेद ने बताया कि शुक्रवार को उन्होंने मुख्यमंत्री और राज्यपाल को फैक्स भेजकर घटना की जानकारी देते हुए आरिफ की बरामदगी की मांग की है। कुछ ग्रामीणों ने हाजी मोमीन के नेतृत्व में मुजफ्फरनगर के डीएम और एसएसपी को भी ज्ञापन देकर आरिफ की सकुशल बरामदगी की मांग की है। आरिफ के पिता मौ.हनीफ का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण अभी तक उनका बेटा सकुशल वापस नहीं आ सका है। इस घटना को लेकर जौला गांव में आक्रोश बना हुआ है। पुलिस और एलआईयू गांव के माहौल पर नजर रखे हुए है।