अदालत ने युवक की हत्या के मामले में एक अभियुक्त को उम्रकैद के साथ 20 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनाई है। कत्ल के 19 साल बाद अदालत का फैसला आया है। साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने एक आरोपी को बरी कर दिया।
जनपद शामली के थाना आदर्श मंडी पर गांव कसेरवा निवासी प्रकाशवती पत्नी यजपाल सिंह ने 15 जुलाई 1999 को मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था उसका बेटा अमरेश घर में बैठा था, तभी उसका समधी सोहनवीर पुत्र जोरा सिंह निवासी दौराला जनपद मेरठ अपने साथी हरेंद्र के साथ आया और अमरेश को एक कोने में ले जाकर बात करने लगा।
सोहनवीर से हमारा जमीन का मुकदमा अदालत में चल रहा था, जिसकी बात करने में गरमागरमी हो गई और सोहनवीर ने तमंचे से गोली मार कर अमरेश की हत्या कर दी। इस मुकदमे में सोहनवीर व हरेंद्र को आरोपी बनाया गया था, मगर विवेचना के दौरान पुलिस ने राजबल के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया था।
सह अभियुक्त हरेंद्र को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई, उसे फरार घोषित करते हुए अदालत ने उसकी फाइल को अलग कर अभियुक्त सोहनवीर व राजबल के खिलाफ ही मुकदमा सुना। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विरेंद्र कुमार पांडे की अदालत संख्या- 8 में हुई ।
एडीजीसी कय्यूम अली ने कोर्ट में दस गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनो पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त सोहनवीर को हत्या का दोषी करार देते हुए धारा 302 के तहत सश्रम आजीवन कारावास और 20 हजार रुपया का जुर्माना की सजा सुनाई है । सह अभियुक्त राजबल को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।