मुजफ्फरनगर। पुलिस को सर्विलांस के जरिये अगर पुख्ता सुबूत हाथ नहीं लगते तो नामजद किए गए आठ बेगुनाह किसान कानूनगो के कत्ल के जुर्म में सलाखों के पीछे होते।
पुलिस ने नामजद किए गए तीन किसानों को पूछताछ के लिए उठा लिया था। शुक्रवार को मुखबिरी करने वाले आरोपी मोहित को पुलिस ने जेल भेज दिया।
मीरापुर निवासी कानूनगो प्रमोद शर्मा की तीन नवंबर को भटौड़ा गांव से पैमाइश कर लौटते समय सिखेड़ा इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी थी।
पूछताछ में प्रमोद के भाई विनोद ने कानूनगो की किसी से रंजिश होने से इंकार किया था, बाद में उन्होंने भटौड़ा गांव में पैमाइश के लिए बुलाने वाले दोनों पक्षों के आठ लोगों को नामजद करते हुए हत्या करने का आरोप लगाया था। पैमाइश के दौरान विवाद होना इसकी वजह बताया गया था।
इस पर छानबीन में जुटी पुलिस उलझ गई थी, क्योंकि यह वजह पुलिस के गले नहीं उतर रही थी। एसएसपी केबी सिंह खुद केस की कमान संभाले हुए थे।
घटनास्थल के आसपास इस्तेमाल किए गए सभी मोबाइल की सीडीआर निकलवाई गई, जिसमें पता चला कि भटौड़ा निवासी मोहित ने तीन फोन नंबरों पर दस मिनट में 28 बार कॉल की। शहर होने पर मोहित को चितौड़ा झाल से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस की सख्ती के आगे वह टूट गया। मोहित ने बताया कि रेत खनन करने पर कानूनगो से उसकी बहसबाजी हो गई थी। मंसूरपुर के जोहरा गांव निवासी रोहित और जड़ौदा निवासी मनीष भी प्रमोद से रंजिश रखते थे। उसने दोनों के साथ मिलकर कानूनगो को रास्ते से हटाने का फैसला किया।
तीन नवंबर को कानूनगो गांव में वोटर लिस्ट की आपत्तियां जानने पहुंचा था। मोहित ने रोहित और मनीष को फोन कर गांव बुला लिया। गांव से कानूनगो जंगल में कुंवरपाल आदि की चकरोड के विवाद में पैमाइश करने पहुंचा। कानूनगो जैसे ही वहां पहुंचा, दोनों ने उसके सिर में गोली मार दी।
पुलिस के खुलासे के बाद केस में नामजद किए गए आठ निर्दोष किसान शूली पर चढ़ने से बच गए हैं। हिरासत में लिए गए तीन किसानों को भी छोड़ दिया है। एसपी सिटी ने बताया कि मोहित का आपराधिक रिकार्ड नहीं है, जबकि रोहित और मनीष के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं। दोनों शूटरों को जल्द पकड़ने के लिए जाल बिछा दिया गया है।