मथेड़ी के किसान जयवीर अचानक खूनखराबे पर क्यों उतर आया, यह सवाल मौका ए वारदात पर जुटी भीड़ में हर किसी के दिमाग में कौंध रहा था। किसान पर छह लाख कर्ज था, लेकिन एकाएक दिमाग में ऐसा क्या आया कि उसने परिवार को खत्म करने की ठान ली। बेटियों की हत्या करने से पहले किसान ने पत्नी मीनू के हाथ भी बांध दिए, ताकि वो अपनी बेटियों को न बचा पाए। किसान की एक बेटी सीबीएसई स्कूल की 11वीं और दूसरी यूपी बोर्ड की नौंवी क्लास की छात्रा थी। छोटा बेटा किस्मत से बच गया।
शुक्रवार दोपहर तक मथेड़ी गांव के किसान जयवीर के घर में सब कुछ सामान्य था। दस बीघा जमीन का मालिक जयवीर खेत पर से काम कर लौटा था। घर आकर खाना खाया। इसी बीच एक फोन आया। फोन उसने अपनी मां प्रकाशी को दिया। प्रकाशी बात करते हुए घर के बाहर आ गई। इसी बीच जयवीर और परिवार के लोगों के बीच क्या बात हुई, इतना बड़ा लोमहर्षक कांड क्यों हुआ, यह बताने के लिए सिर्फ मीनू ही चश्मदीद है।
मीनू गंभीर हालत में हॉस्पिटल में भर्ती है, वह फिलहाल बात करने की स्थिति में नहीं है। गोलियों चलने पर मां प्रकाशी दौड़कर आई तो कुंडी अंदर से बंद होने की वजह से दरवाजा नहीं खुला। आसपास के लोग दौड़कर आए और दरवाजा तोड़ा गया। अंदर का खूनी मंजर देखकर हर किसी का कलेजा दहल गया। बड़ी बेटी श्वेता और छोटी बेटी प्रियांशी की लाशें बेड पर पड़ी हुई थीं। उनके पैरों में जूते थे, यानी उन्हें इसी तरह बेड पर गिराया गया। दोनों ही बेटियों के सिर में गोली लगी थी। मौका ए वारदात पर पहुंचने वाले ग्रामीणों का कहना है कि जयवीर ने बेटियों की जान लेने से पहले पत्नी मीनू के हाथ कपड़े से बांध दिए थे।
बेटियों की चीख निकलने पर मीनू ने किसी तरह हाथ खोले और विरोध जताया। इस पर किसान जयवीर ने मीनू को भी गोली मार दी। छीना-झपटी में निशाना चूक गया और गोली महिला के पैर के आर-पार हो गई। तीनों को मरा समझने के बाद ही जयवीर ने खुद की कनपटी पर गोली मारकर भी जान दे दी। मौके पर पहुंचे अफसरों को परिवार के नजदीकी लोगों ने बताया कि किसान जयवीर की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी।
जयवीर के भाई ओमवीर का कहना है कि उसके ऊपर तीन लाख रुपये सिंडिकेट बैंक और सवा लाख रुपये किसान समिति एवं लगभग पौने दो लाख रुपये अन्य लोगों की देनदारी थी, वह इसको लेकर तनाव में रहता था। इसी वजह से उसने यह कदम उठाया। पुलिस अफसरों ने यह सवाल किया कि ऋण तो बहुत से किसानों पर है, ऐसे में किसान का इतना बड़ा कदम उठाना सोचने पर मजबूर करता है। अधिकारियों ने तहसील से भी जानकारी कराई तो पता चला कि किसान की कोई आरसी भी जारी नहीं हुई थी।
होनहार थी किसान की बेटियां
मृतका किसान की बेटियां होनहार थीं, वह पढ़कर कुछ बनना चाहती थीं। बड़ी बेटी श्वेता सीबीएसई बोर्ड के स्कूल में 11वीं की छात्रा थी, जबकि छोटी बेटी प्रियांशी यूपी बोर्ड के देवी मंदिर कन्या इंटर कालेज में नौंवी की छात्रा थी। पिता खुद अपनी बेटियों को स्कूल में छोड़ने जाया करता था। बेटा 10 वर्षीय कृष्णा में कक्षा पांच में पढ़ रहा है। दोनों बहनें शुक्रवार को स्कूल नहीं गई थीं, वह घर पर ही मौजूद थीं।
दस साल के कृष्णा की जान बच गई
परिवार में जिस वक्त वारदात हुई, उस समय किसान जयवीर का दस साल का बेटा और अपनी मृतका दोनों बहनों का इकलौता भाई कृष्णा घर से बाहर गांव में बच्चों के साथ खेल रहा था। अगर बेटा कृष्णा भी घर पर होता तो उसकी भी जान जा सकती थी। मृतक किसान सात भाइयों में सबसे छोटा था। बुजुर्ग मां प्रकाशी भी छोटे बेटे के साथ रहती थी। अचानक हुई वारदात से हर कोई हतप्रभ है।
बेटियों का पीएम नहीं कराना चाहते थे परिजन
घटना के बाद मौके पर पहुंचे मृतक के बड़े भाई ओमवीर ने किसान की आर्थिक तंगी के चलते यह कदम उठाने की बात कही, जबकि तीसरे नंबर के भाई ओमवार ने थाने में जो तहरीर दी है। उसमें भाई को तनाव और अवसाद ग्रस्त बताया है। उन्होंने घटना की वजह भी यही बताई है। गांव के लोग बेटियों के शवों का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे, लेकिन डीएम और एसएसपी इसके लिए राजी नहीं हुए। उनका कहना था कि पोस्टमार्टम कानूनी कार्रवाई का हिस्सा है।