मुजफ्फरनगर। घासीपुरा ट्रिपल मर्डर मामले के बाद पहले एसपी क्राइम और अब मंसूरपुर कोतवाल आवश्यक कार्य बताकर छुट्टी पर चले गए हैं। सार्वजनिक तौर पर भले ही न सही, लेकिन पूरी कार्रवाई को लेकर अफसर कोतवाल की कार्यप्रणाली से खुश नहीं हैं। फिलहाल मामले को शांत करने के लिए सजातीय दरोगा को कार्यवाहक थानेदार बनाकर मंसूरपुर भेजा गया है।
मंसूरपुर के घासीपुरा में बुधवार रात भारी बारिश और खराब मौसम के बीच बस्ती के किनारे स्थित एक मकान मेें तीन युवकों बागपत निवासी सचिन, दीपक राठी और शामली निवासी गौरव के गोली लगे शव मिले थे। तीन दिन गुजरने के बाद भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है। लिखापढ़ी में मामले को एक-दूसरे के हथियारों से आत्महत्या करना दर्शाया गया है।
उधर, तीनों युवकों की हत्या के बाद से सजातीय लोगों का गुस्सा उफान पर है। मंसूरपुर कोतवाल अमरेश सिंह बघेल निशाने पर हैं। विरोध के बाद पुलिस हर कदम फूंक-फूंककर रख रही है। विरोध करने वाले संगठनों को पुलिस की ओर से समझाने की कोशिश की गई है कि अपराधियों को महिमा मंडित न किया जाए। शुक्रवार को पूरे मामले से जुड़े रहे एसपी क्राइम प्रदीप गुप्ता आवश्यक कार्य बताकर छुट्टी पर चले गए। उनके बारे में बताया गया है कि उनके पिता की तबीयत ठीक नहीं है। शुक्रवार को मृत युवकों के अंतिम संस्कार का कार्य निपटने के बाद शनिवार को अब कोतवाल अमरेश सिंह बघेल भी जरूरी कार्य बताकर पांच दिन की छुट्टी पर चले गए हैं।
खासकर एक बिरादरी के लोगों का गुस्सा कोतवाल के व्यवहार को लेकर है। भागते समय जयदीप का पीछा करने वालों में इंस्पेक्टर बघेल भी शामिल थे। इसी दौरान बदमाश का गोली लगा शव मिला, जिसे पुलिस ने सुसाइड का मामला बताया। हालांकि उसके परिजन अभी भी पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर का आरोप लगा रहे हैं। इससे पहले बघेल पुरकाजी और भोपा में अपनी कार्यशैली को लेकर विवादों में रहे हैं।
घासीपुरा मामले की कमान पुलिस के आला अफसर अपने हाथों में लिए हुए हैं। अंदरूनी तौर पर भी आला अफसर बघेल की कार्यप्रणाली से खुश नहीं हैं। मंसूरपुर में जाट बिरादरी की पंचायत के बाद मामला अभी सुलगता नजर आ रहा है। मामले को ठंडा करने के लिए एसएसपी दीपक कुमार ने पीआरओ जसबीर सिरोही को कार्यवाहक एसओ बनाकर मंसूरपुर थाने भेज दिया है। बुढ़ाना सीओ सुधीर तोमर को भी घासीपुरा प्रकरण में लगाया गया है।