घासीपुरा में मारे गए तीन बदमाशों का पोस्टमार्टम के बाद उनके शव परिजनों की सुपुर्दगी में दे दिए गए। एसएसपी दीपक कुमार ने तीनों मृतकों के परिजनों से अपने आवास पर बातचीत की और उन्हें निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया। उधर, डीएम डीके सिंह ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच एडीएम प्रशासन को सौंप दी है। हालांकि पोस्टमार्टम हाउस पर जमा भाकियू और रालोद नेताओं के विरोध का असर नहीं दिखा।
मंसूरपुर थाना क्षेत्र के गांव घासीपुरा में संदिग्ध परिस्थितियों में खुद की गोलियों का शिकार बने तीनों बदमाशों का शुक्रवार को भारी पुलिस फोर्स के बीच पोस्टमार्टम कराया गया। बुधवार रात हुई फायरिंग में मौके पर पहुंची पुलिस ने एक मकान की छत से तीन शवों को बरामद किया था, जिनकी पहचान गौरव श्योरान पुत्र त्रिलोक निवासी गांव मालैंडी थाना गढ़ीपुख्ता जिला शामली, सचिन पुत्र ओमकार सिंह निवासी गांव बदरखा जिला बागपत और दीपक राठी के रूप में हुई थी।
डॉक्टरों के पैनल ने शव विच्छेदन की प्रक्रिया वीडियोग्राफी के साथ पूरी की। परिजनों के अलावा भाकियू और रालोद नेता भी पोस्टमार्टम हाउस पर डेरा डाले रहे। इसी बीच एसएसपी ने मृतकों के परिजनों को अपने आवास पर बुलाकर बातचीत की। पुलिस पर उठ रहे सवालों पर कप्तान ने उन्हें संतुष्ट किया। एसएसपी ने बताया कि घटनास्थल की फोरेंसिक जांच के लिए लखनऊ स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला की टीम 26 सितंबर को आएगी।
परिजन भी जांच प्रक्रिया के दौरान घासीपुरा घटनास्थल पर आ सकते हैं। पीएम हाउस पर मौजूद रालोद और भाकियू नेता इंस्पेक्टर के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने के लिए अड़ गए। भाकियू नेता चंद्रपाल फौजी, रालोद के संजय राठी आदि से परिजनों ने बात की, तब जाकर मामला शांत हुआ। परिजन ही मामले को तूल देने के इच्छुक नहीं थे। उन्होंने यह तक कह दिया कि लाशों पर राजनीति नहीं चाहते। पुलिस की जांच में तीसरे मृतक दीपक राठी की पहचान भी हो गई। दीपक पुत्र स्व. लालचंद निवासी गांव गांगनौली, थाना दोघट जिला बागपत का निवासी था। फिलहाल इसका परिवार बडौत की चौधरान पट्टी में रहता है।
पुलिस ने तीनों मृतकों के आपराधिक रिकार्ड भी जारी किए गए हैं। दुपहर बाद तीनों के शव परिजनों को सौंप दिए गए। मृतक गौरव के शव को परिजन मालैंडी गांव ले गए, जबकि सचिन के पिता ने शुक्रताल में उसका अंतिम संस्कार किया। दीपक के माता पिता का निधन हो चुका है। उसके शव को भाई और चाचा की सुपुर्दगी में दिया गया। जिसे लेकर वह बड़ौत रवाना हो गए। एसएसपी ने मृतकों के शवों को पहुंचाने की व्यवस्था के निर्देश संबंधित थाना प्रभारियों को दिए। डीएम डीके सिंह ने घटना की मजिस्ट्रीयल जांच एडीएम प्रशासन मनोज कुमार सिंह को सौंप दी है।
हां साहब, भटक गया था बेटा
हां साहब, मेरा बेटा सचिन भटक गया था, वह गलत राह पर निकल गया था। उसे काफी समझाने की कोशिश की गई, लेकिन नहीं माना। मैने उससे अपना नाता तोड़ लिया था। तीन साल से बेटे से बात नहीं की। आज वह मिला तो लाश के रूप में। ये शब्द थे घासीपुरा में मारे गए सचिन के पिता ओमकार सिंह के। एसएसपी दीपक कुमार से बातचीत करते हुए अपने इकलौते बेटे को खो चुके ओमकार की आंखें छलक आईं।
घासीपुरा में मारे गए तीनों बदमाशों के परिजनों को शुक्रवार दुपहर एसएसपी दीपक कुमार ने अपने कार्यालय पर बुलाकर उनसे बातचीत की। कप्तान ने तीनों के परिजनों को घटनाक्रम पर सफाई दी। बागपत के छपरौली थाना क्षेत्र के गांव बदरखा निवासी ओमकार सिंह ने बताया कि वह गाडी़ चलाता है। सचिन भी कार चलाता था, वह लछेड़ा के एक युवक के संपर्क में आने से गलत राह पर चल गया।
लछेड़ा में हुई फौजी की हत्या में उसका नाम आया। बेटे को समझाने का प्रयास किया, मगर वह नहीं माना, तब मैंने तीन साल पहले उससे नाता तोड़ लिया था। मैं बीते तीन साल से देहरादून में ढाबा चला रहा हूं। गांव में भी आना-जाना बेहद कम हो गया है। बृहस्पतिवार को सचिन के मारे जाने की खबर गांव वालों ने दी।
दूसरे मृतक गौरव के चाचा ने बताया कि भतीजा गौरव कहना नहीं मानता था। गांव में वह कम ही आता था। तीसरे मृतक दीपक राठी के चाचा लाल सिंह और नोएडा में नौकरी कर रहे छोटे भाई सूरज ने बताया कि दीपक बड़ौत में हमारे साथ ही रहता था। करीब डेढ़ दशक पहले गांगनौली में पिता और मां की मौत के बाद चाचा ने ही उसे पाला-पोसा था। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि दीपक मारा गया। बीते दस दिनों से उसका परिजनों से कोई संपर्क नहीं था।