शामली रोड पर मकान में भ्रूण लिंग परीक्षण के भंडाफोड़ के बाद विभाग टेक्निकल प्वाइंट पर अटक गया है। वेस्ट यूपी में इस प्रकार से अल्ट्रासाउंड करने का यह पहला मामला है। स्वास्थ्य विभाग के हाथ अल्ट्रासाउंड का जो साफ्टवेयर लगा है, उसमें कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए हैं। सॉफ्टवेयर एप्पल सरीखे फोन, टैबलेट को ही सपोर्ट कर रहा है, जो वाईफाई कनेक्ट होने पर एक्टिव होता है। एंड्रॉयड मोबाइल पर इसका सपोर्ट नहीं है। साफ्टवेयर के यूएसए में तैयार होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके लिए टेक्निकल टीम जांच-पड़ताल में जुटी है।
पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत स्थान, मशीन के साथ ऑप्रेटर रेडियोलॉजिस्ट (चिकित्सक) पंजीकृत होना जरूरी है। शामली रोड पर भ्रूण लिंग के परीक्षण में अजीब खेल देखने को मिला है। वहां चिकित्सक, मशीन के साथ स्थान भी अपंजीकृत मिला है। मौके से मिले टैबलेट में साफ्टवेयर की स्वास्थ्य विभाग ने रातभर जांच-पड़ताल की है, जिसमें इतना साफ हुआ कि यह विशेष साफ्टवेयर अल्ट्रासाउंड स्क्रीनिंग के लिए एप्पल जैसे वर्जन पर ही सपोर्ट करता है। आम एंड्रायड उत्पादकों पर इसका संचालन नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार का साफ्टवेयर तैयार करने का कार्य यूएसए के साथ चीन में होता है। विभाग की टेक्निकल टीम इस पहलू पर जांच-पड़ताल में जुटी है कि यह साफ्टवेयर कहां से और किसके माध्यम से रूपेश गौतम तक पहुंचा है। इंटरनेट पर उक्त साफ्टवेयर के समान कई अन्य गतिविधियों को खंगाला गया है, जिसमें कई संदेहजनक रिकार्ड हाथ लगे हैं। यह साफ्टवेयर वाईफाई के संपर्क में आने पर एक्टिव होता है। सवाल है कि अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर वर्तमान में लैपटॉप, मोबाइल फोन और टैबलेट आम हो गए हैं। विभाग को टेंशन है कि मशीन, चिकित्सक को ट्रेस किया जा सकता है, मगर टैबलेट पर अल्ट्रासाउंड पकड़ना आसान नहीं है। पीसीपीएनडीटी के नोडल प्रभारी डॉ एसके अग्रवाल ने बताया कि साफ्टवेयर की जांच में कई तथ्य सामने आए हैं, जिनकी गहनता से जांच चल रही है। मामले में टेक्निकल इंजीनियरों की मदद ली जा रही है।
अल्ट्रासाउंड जांच में गर्भपात का खेल
मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य विभाग जांच-पड़ताल में कई पहलुओं पर कार्य कर रहा है। इसमें अल्ट्रासाउंड की जांच के बाद कन्या भ्रूण हत्या होने का खेल भी हो सकता है। क्योंकि ग्राहक को झूठी चीजें बताकर गर्भपात होने का अनुमान भी है। इस प्रकार के खेल मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी सामने आ चुके हैं। विभाग अपने स्तर से जांच-पड़ताल कर रहा है।
गिरोह है तो रासुका तक की कार्रवाई
मुजफ्फरनगर। अल्ट्रासाउंड के माध्यम से भ्रूण लिंग परीक्षण का धंधा चला रहे लोगों की संख्या पांच से अधिक है तो गिरोह माना जाएगा। इस पर रासुका तक की कार्रवाई संभव है। यह अपराध पीसीपीएनडीटी एक्ट में आता है, जिसमें आईपीसी की धारा 315, 240, 304(ए) आदि में कार्रवाई बनती है। फिलहाल पुलिस भी मामले में पूरे गिरोह की तलाश में जुटी है।