सात माह के अंतराल में ही बुन दिया जाल
मुजफ्फरनगर। इंडसइंड बैंक की शुरुआत जिले में 13 जून 2017 से हुई। सात माह के अंतराल में ही बैंक कस्टमर सर्विस मैनेजर ने चार करोड़ का घोटाला कर डाला। सवाल यह है कि यह खाता विभाग के किस कर्मचारी ने खोला और किसके नाम खोला गया। बैंक मैनेजर बुधवार को नदारद मिले, किसी कर्मचारी ने भी कोई जानकारी नहीं दी।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकर के खाते से चार करोड़ निकालने वाला मास्टरमाइंड गौरव गर्ग जिले के इंडसइंड बैंक का कस्टमर सर्विस मैनेजर है। मुंबई के अधिकारियों के माध्यम से और जिले के ही मीरापुर के रहने वाले मासूम अली और सलमान के सहयोग से वह चार करोड़ का खेल करने में सफल रहा। सहारनपुर के डीएम और एसएसपी इस मामले को उजागर करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार करा चुके हैं। इसमें सवाल यह खड़ा हो रहो है कि मुजफ्फरनगर में सात माह पहले स्थापित इंडसइंड बैंक में खाता भूमि अध्याप्ति विभाग के किस कर्मचारी ने खुलवाया और खाता किसके नाम खुला। खाता खुलवाने के लिए किस अधिकारी से अनुमति ली गई। मात्र सात माह के बैंक के कार्यकाल में इतना बड़ा खेल कैसे हो गया। बुधवार को बालाजी चौक स्थित इस बैंक में मैनेजर अनुपम जैन अपने कार्यालय में नहीं मिले। बैंक के अन्य कर्मचारियों ने भी कोई जानकारी नहीं दी। आरोपियों के जेल जाने के बाद बैंक के अधिकारी भी अपने स्तर से जांच कर रहे हैं। पूरे खेल में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की कुंडली खंगाली जा रही है। जांच के बाद बैंक अपनी ओर से भी कार्रवाई की तैयारी में है।
खाते का संचालन सहारनपुर से
मुजफ्फरनगर। एनएचएआई के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण का अधिकार भूमि अध्याप्ति अधिकारी सहारनपुर को हैं। खाता मुजफ्फरनगर में है जरूर, लेकिन उसके संचालन का कार्य सहारनपुर से एसएलओ ही देख रहे हैं।
सियाराम मौर्य, एडीएम वित्त
अनुपम ने चुप्पी साधी
मुजफ्फरनगर। ब्रांच मैनेजर अनुपम जैन से जब बात की गई तो उन्होंने चुप्पी साध ली और कुछ भी बताने से इंकार कर दिया। जैन ने बताया कि सहारनपुर के अधिकारी जांच कर रहे हैं, पूरे मामले की जानकारी भी उन्हीं के पास है। हम अपनी तरफ से कोई जानकारी नहीं दे सकते।