ग्रामीणों ने पशुओं को जंगल में छोड़ने के शक में सचिव और चालक को पीटा
मोरना (मुजफ्फरनगर)। ग्रामीणों ने फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले आवारा पशुओं को जंगल में छोड़े जाने के शक में ग्राम सचिव और ट्रक चालक की पिटाई कर दी। ग्रामीणों ने सचिव और चालक को बंधक बना लिया, जिसको लेकर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने सचिव व चालक को ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाया। सूचना पर सीओ भी मौके पर पहुंच गए थे।
बघरा ब्लॉक के ग्राम सचिव शिवकुमार नौ गोवंश को ट्रक में लादकर गांव फिरोजपुर स्थित महर्षि परमहंस जी महाराज गोशाला में छोड़ने के लिए जा रहे थे। गोवंश से भरा ट्रक गांव फिरोजपुर पहुंचा, तो ग्रामीणों को किसी ने बताया दिया कि आवारा पशुओं को उनके जंगल में छोड़ा जाएगा। इसी आशंका को लेकर ग्रामीणों ने ट्रक को रोककर उसमें बैठे ग्राम सचिव व चालक को नीचे उतारकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। ग्रामीणों ने सचिव व चालक को बंधक बना लिया था। ग्रामीणों की पिटाई से घबराए ग्राम सचिव ने बीडीओ बघरा को घटना की सूचना दी। बीडीओ ने पुलिस अधिकारियों को इसकी सूचना फोन पर दी। ग्राम सचिव व चालक के साथ मारपीट व उनको बंधक बनाने की सूचना से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना पर सीओ राममोहन शर्मा, थाना भोपा प्रभारी निरीक्षक अपराध यतेंद्र सिंह, थाना ककरौली प्रभारी जितेंद्र अंबावत, शुकतीर्थ चौकी प्रभारी योगेंद्र पंवार पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बंधक बनाए गए ग्राम सचिव व ट्रक चालक को ग्रामीणों से मुक्त कराया। इस दौरान पुलिस को भी ग्रामीणों का विरोध झेलना पड़ा। ग्रामीणों का कहना था कि इधर उधर से लाकर गोवंश को उनके गांव के पास जंगलों में छोड़ दिया जा रहा है। आवारा पशु उनकी फसलों को नष्ट कर रहे हैं। प्रशासन या तो उनकी फसलों का मुआवजा दें, अथवा पशुओं को जंगल में न छोड़ें। फसलों की सुरक्षा को लेकर ग्रामीण दिन रात जंगलों में पहरा दे रहे हैं। पूरे साल की मेहनत को आवारा पशु चट कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान हो रहा है। पुलिस द्वारा गोवंश को महर्षि परमहंस जी महाराज गोशाला ले जाया गया, जहां पर गोशाला संचालक वेदपाल ने ना नुकुर के बाद किसी तरह से गोवंश को गौशाला में रखना स्वीकारा। गोशाला संचालक ने बताया कि गायों के खाने के लिए कोई शासन व प्रशासन से उन्हें नहीं मिल रही है। वे कहां से इन गायों को चारा आदि खिलाएंगे। गौशाला में पहले से ही गायों के चारे की व्यवस्था भी नहीं हो पा रही है।