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Muzaffarnagar News: नफीस कालिया गिरोह के शूटर सजायाफ्ता नईम, हत्यारोपी माशूक की मौत

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- सजा होने के बाद दोनों जिला जेल में थे बंद, काफी समय से चल रहे थे बीमार
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। नफीस कालिया गिरोह के शूटर रहे जिला जेल में बंद सजायाफ्ता गैंगस्टर खालापार निवासी नईम धोबी (54) की जिला जेल में मौत हो गई। वहीं शामली के गांव हिंड निवासी हत्या के मामले में सजायाफ्ता माशूक अली (67) की जिला अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। दोनों लंबे समय से बीमार चल रहे थे। नईम के परिजनों ने जेल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर मोर्चरी पर हंगामा भी किया।

खालापार के मोहल्ला कस्सावान निवासी नईम धोबी को गैंगस्टर एक्ट के मामले में सजा हुई थी। वह जेल में सात सितंबर 2023 से बंद था। वह काफी समय से ह्दय रोग से पीड़ित था, उसका जेल में 2023 से ही उपचार चल रहा था। ज्यादा तबीयत खराब होने पर उसे तीन जून 2024 को जिला अस्पताल भेजा गया। बाद में मेरठ मेडिकल भेजा गया। वहां पर उसके ह्दय में तीन स्टंट डाले गए। 14 जून 2025 को वहां से वापस लाया गया।
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15 जून रविवार सुबह छह बजे अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई तो जेल के वार्डर सुरेश चंद व बंदी रक्षक ललित शर्मा उसे उपचार के लिए जिला अस्पताल ले गए। वहां उसे मृत घोषित कर दिया। उधर, जिला अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि जेल कर्मचारी नईम धोबी को मृत हालत में लेकर आए थे।



जेल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप, किया हंगामा

मुजफ्फरनगर। नईम धोबी के भाई नफीस व बेटे नदीम ने जेल के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्हें सुबह छह बजे नईम की मौत की सूचना दी गई। नदीम ने कहा कि उसके पिता की जल्द रिहाई होनी थी। हार्ट की समस्या के चलते जेल प्रशासन ने उन्हें मेरठ में भर्ती कराया, जहां सर्जरी के दौरान उनके ह्दय में स्टंट डाले गए।

इलाज पूरा नहीं हुआ था, फिर भी जिला जेल के डॉक्टरों ने उन्हें मेरठ अस्पताल से जल्द छुट्टी दिला दी। उसके पिता की मौत रात में ही हो गई थी, यह लापरवाही का मामला है। परिजनों ने कार्रवाई की मांग कर मोर्चरी पर हंगामा किया।


नफीस कालिया गिरोह का शूटर रहा नईम

मुजफ्फरनगर। पुलिस के अनुसार, नईम धोबी नफीस कालिया गिरोह का शॉर्प शूटर रहा है। 1980 के बाद उस पर, कुख्यात नफीस कालिया, सलीम तोतला आदि के साथ मिलकर हत्या, डकैती, लूट आदि की घटनाओं के आठ मुकदमे थे।



1991 में शहर कोतवाली में नईम धोबी आदि पर गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा दर्ज हुआ था। 1996 में मिमलाना रोड स्थित एक फार्म हाउस के चौकीदार से मारपीट कर ट्रैक्टर लूटने के प्रयास में सलीम तोतला, नईम धोबी आदि पकड़े गए थे।

इसी गिरोह ने सरवट गेट पर 31 दिसंबर 1988 को अजमल छिम्पी की हत्या की। नगर पालिका सभासद रमजान का लद्दावाला में अपने कार्यालय पर बैठे हुए 19 अगस्त 1989 को हत्या की।
जनवरी 1990 को मेरठ के शहीद स्मारक भैंसाली में शराब ठेकेदार से लूट करने की योजना बनाने के मामले में नईम आदि पकड़े गए। अप्रैल 1991 को मोहल्ला खालापार की गूलर वाली गली में मल्लूपुरा निवासी कय्यूम पर गिरोह के सदस्यों ने फायरिंग की थी। जून 1991 को ईद के दिन मुजफ्फरनगर निवासी शफीक को गोली मारकर हत्या की।

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हत्या में सजायाफ्ता कैदी की उपचार के दौरान मौत

मुजफ्फरनगर। जेल अधीक्षक ने बताया कि जनपद शामली के थाना थानाभवन के गांव हिंड निवासी माशूक अली पर लेनदेन विवाद में पड़ोसी जफरयाब की हत्या का आरोप था। इस मामले में 24 मई 2022 से जेल में बंद था। उसे आजीवन कारावास की सजा हो चुकी थी।
माशूक को दिमागी, उच्च रक्त चाप व क्रोनिक ब्रोन्काइटिस की बीमारी थी। उसे 27 अप्रैल को मेरठ से सफदरजंग अस्पताल में ले जाकर दो माह तक भर्ती रखा। वहां से पांच जून को लाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। रविवार सुबह दस बजकर 40 मिनट पर उसकी मौत हो गई। सुरक्षा में तैनात बंदी रक्षक संजय सिंह ने यह सूचना जेल अधिकारियों को दी थी। उधर, मृतक के बेटे आस मोहम्मद ने बताया कि उनके पिता को गले से सांस लेने में भी परेशानी थी। पोस्टमार्टम के बाद वह शव अपने साथ ले जा रहे हैं।
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इन्होंने कहा-
जेल अधीक्षक अभिषेक चौधरी ने कहा कि दोनों कैदियों के शव के पोस्टमार्टम की वीडियोे ग्राफी कराने व जांच के लिए मजिस्ट्रेट नामित करने के लिए अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उधर, दोनों कैदियों के शव का पंचनामा नायब तहसीलदार हरेंद्र सिंह ने भरा है।
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