मीट की दुकानें बंद कर धरना देते मुस्लिम समाज के लोग।
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मुख्यमंत्री महंत आदित्यनाथ द्वारा गोकशी और कमेलों को बंद करने के आदेश के बाद शहर के मीट व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर रोष प्रकट किया है। पीड़ितों का कहना है कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक वह अपनी दुकानें नहीं खोलेंगे। पीड़ितों ने प्रशासन से मामले में समाधान कराने की मांग की है।
सूबे में सपा सरकार में अवैध कटान चरम पर था। चुनाव के बाद सरकार बदली और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने। सीएम ने सबसे पहले अवैध कटान और गौकशी पर प्रतिबंध लगाया। कटान पर रोक लगते ही मंगलवार को शहर कोतवाली प्रभारी पीपी सिंह ने खालापार चौकी पर मीट की दुकानें करने वाले दुकानदारों की बैठक ली। कोतवाल ने कहा कि यदि किसी ने अवैध कटान किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी से इसे बंद करने को कह दिया। सरकार के आदेश पर कार्रवाई होने पर काम धंधा बंद होता देख बुधवार को मीट कारोबारी सड़कों पर उतर आए।
खालापार के सैकड़ों मीट दुकानदारों ने अपनी-अपनी दुकानें बंद कर दी और बाजार में ही सड़क पर बैठकर धरना दिया। दुकानदारों का कहना था कि प्रशासन की एकतरफा कार्रवाई के चलते उनके धंधा चौपट हो गया है और उनके सामने रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। उनका कहना था कि ऐसे हालात में उनके लिए अपने परिवारों का पालन-पोषण करना मुश्किल हो जाएगा। पीड़ित दुकानदारों ने प्रशासन से मामले के समाधान की मांग की। कहा कि जब तक समाधान नहीं होगा तब तक वह अपनी दुकानें नहीं खोलेंगे। फैसले को लेकर मीट कारोबारियों में रोष व्याप्त है।