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उपचार नहीं मिला तो सीएमएस को करना पड़ा फोन

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उपचार नहीं मिला तो सीएमएस को करना पड़ा फोन
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मुजफ्फरनगर। जिला चिकित्सालय में होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी के रूप में तैनात डॉ. सचिन जैन कोरोना की गिरफ्त में आ गए। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया तो 26 घंटे उनके परिवार से 40628 रुपये वसूल लिए। रात में जब कोई उपचार के लिए नहीं पहुंचा, तो सीएमएस को फोन करना पड़ा, तब दवा दी गई।
जिला प्रशासन ने दो अस्पतालों को निजी कोविड हॉस्पिटल बनाया है। शुरू में इन अस्पतालों ने एक बेड का एक दिन का 11 हजार रुपया खर्च लेने की बात कही थी। बीमारों की संख्या बढ़ते ही इन हॉस्पिटल में मनमर्जी की वसूली शुरू हो गई। हालात यह है कि एक अस्पताल में जिला चिकित्सालय में तैनात चिकित्सक डॉ. सचिन जैन को कोरोना संक्रमित होने के कारण उनके परिजनों भर्ती कराया था।
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आरोप है कि चिकित्सक के परिजनों से 26 घंटे के 40628 रुपये वसूले गए। वह भी तब जब 11 मई की शाम तीन बजकर 22 मिनट पर भर्ती होने के बाद देर रात तक उन्हें कोई पूछने ही नहीं आया। सचिन ने सीएमएस को हालात बताए तो चिकित्सकों ने ट्रीटमेंट शुरू किया। हॉस्पिटल में एक ही हॉल में 20 मरीज हैं, कुछ के पास बेड है तो कुछ को फोल्डिंग पर ही लिटा दिया गया है।
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योगी को ट्वीट कर कहा, बचा रहा तो फिर से सेवा देंगे
कोरोना की चपेट में आए डॉ. सचिन जैन ने सिस्टम से हताश होकर सीएम योगी को ट्वीट किया। जिसमें कहा कि वह ड्यूटी करते हुए संक्रमित हुए हैं। बचे रहे तो फिर से सेवा देंगे। दूसरे ट्वीट में तो यहां तक लिख दिया कि अगर वापस नहीं लौटा तो आपसे मिलने की अधूरी ख्वाहिश को दोबारा जन्म लूंगा। आप मुजफ्फरनगर आए तो मेरी दोनों बेटियों को आशीर्वाद देना। सोशल मीडिया पर उनकी ये मार्मिक अपील पूरे दिन छाई रही।
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