मुजफ्फरनगर। फर्जी जमानतियों के सहारे गैंगस्टर नीरज बाबा उर्फ चीता जेल की सलाखों से बाहर निकल आया। ट्रायल शुरू हुआ तो आरोपी और जमानती अदालत में नहीं पहुंचे। बाबा के गैर जमानती वारंट जारी किए गए। अदालत की चिट्ठी पर एसएसपी संजय वर्मा ने जांच शुरू कराई तो फर्जीवाड़े की कहानी खुल गई। जमानती दर्शाए गए दो भाइयों में से एक की मौत 17 साल पहले हो चुकी है, जबकि दूसरे ने जमानत नहीं ली। अब पुलिस गैंगस्टर चीता की तलाश कर रही है।
मेरठ के थाना रोहटा क्षेत्र के गांव अट्टा चिंदौड़ी निवासी नीरज बाबा उर्फ चीता के खिलाफ खतौली पुलिस ने 2022 में गैंगस्टर का मुकदमा दर्ज किया था। आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। तीन साल पहले ही मेरठ के हस्तिनापुर के रहने वाले प्रताप सिंह और उसके बड़े भाई बिलख सिंह के नाम पर आरोपी की जमानत ली गई। कोर्ट से आदेश होने पर गैंगस्टर को जेल से रिहा कर दिया गया।
पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया। ट्रायल शुरू हुआ लेकिन आरोपी अदालत में हाजिर नहीं हुआ। अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी कर दिए। कोर्ट ने दोनों जमानतियों को हाजिर होने के आदेश जारी कर दिए, लेकिन दोनों भाई पेश हुए। गैंगस्टर कोर्ट ने एसएसपी को जमानतियों और आरोपी के सत्यापन कराने के आदेश जारी किए। एसपी सिटी सत्य नारायण ने जांच कराई। मेरठ के हस्तिनापुर में पुलिस टीम को भेजा और जमानतियों के बारे में जानकारी कराई।
दिए गए पते पर जमानती नहीं मिले। छानबीन के बाद किसी तरह जमानती बिलख सिंह का बेटा मिला। यहां जांच में खुलासा हुआ कि उसके पिता ने जमानत नहीं ली है जबकि ताऊ प्रताप सिंह की 2008 में मौत हो चुकी है। एसपी सिटी ने बताया कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट भेज दी है। मेरठ के एसएसपी को भी पत्र भेजा गया है। आरोपी नीरज बाबा के खिलाफ दर्ज सभी मामलों के जमानतियों की भी जांच करने के आदेश दिए गए है। जांच के जमानतियों के गिरोह का खुलासा किया जाएगा।
पेशेवर जमानतियों की तलाश में विशेष अभियान शुरू
एसपी सिटी ने बताया कि फर्जी व पेशेवर जमानतियों के मामले में एडीजी के निर्देश पर मंगलवार से सत्यापन शुरू कर दिया गया। जांच में पाए जाने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह अभियान एक माह चलेगा। थानों में जमानत सत्यापन के मामले में दो रजिस्टर बनाए जाएंगे। थानों के रिकॉर्ड को अपडेट करने के आदेश दिए हैं।