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Muzaffarnagar News: जानी खुर्द से भूपगढ़ी पैदल गए थे चौधरी चरण सिंह

Tue, 23 Dec 2025 01:39 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
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मेरठ। भारत रत्न चौधरी चरण सिंह चाहे किसी पद पर रहे लेकिन किसान और गांव की माटी को नहीं भूले। वह सादगी की मिसाल थे। बात 1967 की है, जब चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बन चुके थे। इसके बाद वे अपने गांव भूपगढ़ी आए। उन्होंने अपने सरकारी अमले को गांव के बाहर जानी खुर्द में ही छोड़ दिया और अपने सहपाठी स्वतंत्रतासेनानी पंडित छोटन लाल उपाध्याय के साथ पैदल ही गांव में पहुंचे। यहां के लोगों का हाल-चाल जाना। उनके तहेरे भाई चौधरी गिरोही सिंह बीमार थे। उनकी सेहत के बारे में जानकारी ली।
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सोमवार को यह किस्सा चौधरी चरण के पौत्र चौधरी आदेशपाल ने भूपगढ़ी में बताया। उन्होंने बताया कि चौधरी चरण सिंह की प्रारंभिक शिक्षा जानी खुर्द के प्राथमिक विद्यालय नंबर एक से हुई। यहां से कक्षा पांच तक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद सिवाल के मदरसे में भी पढ़े। यहां से उनका परिवार भदौला (अब गाजियाबाद) चला गया।
भूपगढ़ी के चौधरी आदित्य पाल और चौधरी अनिल कुमार ने बताया कि चौधरी चरण सिंह एक बार दलपत सिंह की दुकड़िया पर भी आए थे। उन्होंने गांव में बिजली की व्यवस्था कराई और बम्बे का पुल बनबाया। उन्होंने कहा कि आज भी चौधरी साहब और उनके विचार सभी के दिलों में जिंदा हैं।
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पांच पैसे का पोस्टकार्ड डाल देता

चौधरी आदेशपाल बताते हैं कि गांव से परिवार के लोग चौधरी साहब से मिलने जाते रहते थे। वे अक्सर कहते थे कि इतनी दूर आने की क्या जरूरत थी, पांच पैसे का पोस्टकार्ड डाल देता। अच्छा बता क्या काम है, फिर वे डांटते भी थे और उसे वापस भेज देते थे। परिवार के लोग घर पहुंचते थे तो काम हो जाता था। गांव वालों को खाना खिलाकर ही भेजते थे।





बैरक नंबर 12 में बंद रहे



स्वतंत्रता सेनानी पंडित छोटन लाल उपाध्याय के पौत्र दिनेश कुमार बताते हैं कि चौधरी चरण सिंह उनके दादा के साथ जानी खुर्द के विद्यालय में पढ़ते थे। आजादी की लड़ाई में दोनों साथ-साथ रहे और कई बार जेल भी गए। अंग्रेजों ने उन्हें मेरठ की बैरक नंबर-12 में बंद रखा। इसके बाद उन्हें हस्तिनापुर के जंगल में छोड़ दिया। यहां से वे ढूंढते हुए गढ़ में निकल गए। वहां उन्होंने अपने बारे में बताया कि वे आजादी के लड़ रहे हैं। यहां उनके भाषण का आयोजन किया गया। इसके बाद उन्हें गढ़ से गिरफ्तार कर लिया गया।

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मुन्नू हलवाई के पेड़े थे पसंद

अशोक कुमार ने बताया कि चौधरी साहब मिठाई खाने का शौक रखते थे। उन्हें जानी खुर्द के मुन्नू हलवाई के पेड़े बहुत पसंद थे। गांव से जब लोग मिलने के लिए जाते थे तो उनके लिए पेड़े लेकर जाते थे।
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