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44 सदस्यीय परिवार के मुखिया डॉ. मलिक

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चरथावल। समाज में ऐसे परिवारों की कमी भी नहीं है, जो वरिष्ठजनों के मार्गदर्शन का मूल्य बखूबी समझते हैं। परिवार की उन्नति में उनके जीवन अनुभव तथा संस्कारों को सबसे अहम मानते है। क्षेत्र के गांव बधाई कलां निवासी डॉ. केपीएस मलिक का परिवार इसकी जीती-जागती मिसाल है।
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खेती-किसानी से जुड़े स्वर्गीय चौधरी लाल सिंह ने अपने आठ पुत्रों को कुटुंब की कीमत समझाई थी। तीन पुत्र अब दुनियों में नहीं हैं। कैसे बुजुर्गों के मार्गदर्शन में परिवार प्रगतिशील बनते है ? उन्होंने परिश्रम से अपनी पीढ़ी को उच्च शिक्षा से जोड़ा, जिसकी वजह से परिवार में डॉक्टर, मेजर, ब्रिगेडियर जैसे पदों पर लोग पहुंचे। 75 बरस के हो चुके डॉ. मलिक सफदरजंग हॉस्पिटल दिल्ली में नेत्र रोग विभागाध्यक्ष से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वह और उनकी पत्नी डॉ. शशि प्रतीक फिलहाल एम्स, ऋषिकेश में सेवाएं दे रहे है। खेती बाड़ी छोटे भाई विजयपाल सिंह संभालते है। उनकी पत्नी गांव की प्रधान रह चुकी हैं। एक भाई नरेंद्र सिंह मलिक बैंक मैनेजर पद से रिटायर हैं।
भतीजे अधिवक्ता नीरज कांत मलिक बताते हैं कि बुजुर्गों से मिली प्रेरणा से 44 सदस्यों के परिवार के कई लोग देश-विदेश में उच्च पदों पर तैनात है। बड़ों के मार्गदर्शन से नई पीढ़ी के जीवन में शिक्षा की रोशनी आई है। उनका कोई भी आदेश परिवार के सर मत्थे रहता है। भाई विजय पाल, भतीजे मधुर, मोहित और अवधेश कहते हैं कि शिक्षा का विषय हो या शादी की बात, परिवार में सबसे बड़े डॉ. मलिक की सलाह के बिना कोई निर्णय नहीं होता है। उनका अनुभव, ज्ञान और सीख परिवार की अमूल्य धरोहर है।
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