नगरपालिका चेयरमैन पंकज अग्रवाल की बर्खास्तगी का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने माना है कि चेयरमैन को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। शासन की बर्खास्तगी की कार्रवाई नेचुरल जस्टिस के खिलाफ है। चेयरमैन की बहाली से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। वहीं, भाजपा को हाईकोर्ट के निर्णय से बड़ा झटका लगा है।
प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनते ही नेताओं ने प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात कर चेयरमैन पंकज अग्रवाल को बर्खास्त कराने की भूमिका तैयार कर ली थी। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान, जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी, विधायक कपिलदेव अग्रवाल खुद मामले की कमान संभाले हुए थे। चेयरमैन के खिलाफ शहर के ही खालिद की शिकायत पर जांच चल रही थी।
शासन में दबाव बनाकर जांच प्रक्रिया को जल्दबाजी में पूरा कराया गया और शासन से चेयरमैन को बर्खास्त कराने में बीजेपी नेताओं को सफलता भी मिल गई। शासन की ओर से एक अप्रैल को पालिकाध्यक्ष को बर्खास्त कर दिया गया। नगरपालिका अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने शासन की ओर से की गई कार्रवाई के विरोध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी। चीफ जस्टिस डीबी भोसले, जस्टिस यशवंत वर्मा ने बृहस्पतिवार को याचिका पर सुनवाई की।
हाईकोर्ट में पंकज अग्रवाल के अधिवक्ता निपुण सैनी ने बताया कि न्यायालय ने बर्खास्तगी के आदेश को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने माना कि चेयरमैन को न तो नोटिस दिया गया और न ही उनका पक्ष जाना गया। बर्खास्तगी नेचुरल जस्टिस के खिलाफ है। उधर, बहाली से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। बीजेपी नेताओं को हाईकोर्ट के आदेश से बड़ा झटका लगा है।
सच्चाई की जीत हुई: अग्रवाल
मुजफ्फरनगर। हाईकोर्ट के आदेश पर बहाल हुए नगरपालिका अध्यक्ष पंकज अग्रवाल का कहना है कि बीजेपी नेताओं ने बिना किसी कसूर के जबरन उनकी बर्खास्तगी कराई थी। न्यायालय से हमें इंसाफ मिला है। हमें पहले दिन से ही पूरी उम्मीद थी कि न्याय जरूर मिलेगा। सच्चाई की जीत हुई है।
नगरपालिका की राजनीति में भाजपा को झटका
नगरपालिका चेयरमैन पंकज अग्रवाल की बर्खास्तगी का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट से निरस्त होने के कारण भाजपा को तगड़ा झटका लगा है। उधर, चेयरमैन की बहाली से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनते ही नेताओं ने प्रदेश के नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना से मुलाकात कर चेयरमैन पंकज अग्रवाल को बर्खास्त कराने की भूमिका तैयार कर ली थी।
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान, जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी, विधायक कपिलदेव अग्रवाल खुद मामले की कमान संभाले हुए थे। भाजपा के दबाव के कारण चेयरमैन को बर्खास्त कराने में पार्टी नेताओं को सफलता भी मिल गई। शासन की ओर से एक अप्रैल को पालिकाध्यक्ष को बर्खास्त कर दिया गया।
नगरपालिका अध्यक्ष पंकज अग्रवाल ने शासन की ओर से की गई कार्रवाई के विरोध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में चुनौती दी। इस पर हाईकोर्ट ने माना कि चेयरमैन को न तो नोटिस दिया गया और न ही उनका पक्ष जाना गया। उधर, पालिकाध्यक्ष की बहाली से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। बीजेपी नेताओं को हाईकोर्ट के आदेश से बड़ा झटका लगा है।