शिक्षा उत्थान के भगीरथ स्वामी कल्याण देव महाराज का 142वां जन्मोत्सव मनाया गया। जिसमें पुरोहितों के वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच स्वामीजी की पादुका का गंगा जल, दूध, पंचमेव, शहद, केसर आदि से पूजन हुआ। साधु-संतों, श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया।
भागवत कथा उद्गम स्थल के रूप में विख्यात शुक्रताल धर्मनगरी के शुकदेव आश्रम में ब्रह्मलीन स्वामी कल्याणदेव के जन्मोत्सव कार्यक्रम में उनके परमशिष्य स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि स्वामी जी मानव जाति के सच्चे पथ प्रदर्शक थे। उन्होंने गरीबों, दीन-दुखियों, पीड़ितों, दलितों, पिछड़ों के लिए उदारक और प्ररेणास्रोत का कार्य किया। जिन्होंने गांव-गांव जाकर शिक्षा मंदिरों का निर्माण कराकर ज्ञान ज्योति को प्रज्ज्वलित करने का भगीरथी प्रयास किया।
राष्ट्र समाज के निर्माण में उनकी सेवाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। सारा समाज उनका ऋणि रहेगा। शिक्षा, चिकित्सा, कृषि शिक्षा, तकनीकी, आध्यात्मिक शिक्षा के उत्थान में उनकी सेवाएं अतुल्नीय हैं। इससे पूर्व आश्रम के प्रांगण में स्थित समाधि मंदिर में कथा व्यास मदन मोहन मिश्रा, स्वामी हनुमान दास सुल्तानपुर, अन्नूरोध विजय स्वरूप हरिद्वार, राधे-राधे महाराज बनारस, स्वामी वासुदेव शास्त्री पलवल, बाल कथा व्यास अचल कृष्ण शास्त्री के सानिध्य में पुरोहित आचार्य उप्रेती, प्रदीप शास्त्री, आशीष शास्त्री, कृष्णा शास्त्री आदि के साथ विद्यार्थियों ने उच्च स्वर में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच स्वामीजी की समाधि पादुका और प्रतिमा का पूजन कराया। इस मौके पर पूर्व प्रधानाचार्य गजेंद्रपाल सिंह, कैप्टन सुरेश त्यागी, मांगेराम, राजू, राजेंद्र, अनिल, नरेश तिवारी, केवल कृष्ण बोहरा, रविशकंर त्रिवेदी आदि मौजूद रहे।
शिक्षाऋषि की राष्ट्र सेवाएं अमूल्य
मुजफ्फरनगर। शिक्षाऋषि वीतराग स्वामी कल्याणदेव जी महाराज की जयंती पर उनका नमन किया गया। राजकीय आयुर्वेदिक कालेज रामपुर में महान कर्मयोगी संत का भावपूर्ण स्मरण किया गया। प्राचार्य डीके मौर्य ने कहा कि देश के ग्रामीण अंचल में शिक्षा की ज्योति जगाकर वीतराग संत ने राष्ट्र की सच्ची सेवा की हैं।
कॉलेज संस्थापक स्वामी कल्याण देव महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर प्राचार्य डी के मौर्य ने शिक्षाऋषि की अमूल्य राष्ट्र सेवाओं को याद किया। उन्होंने कहा कि देश के ग्रामीण अंचल में शिक्षा की अलख जगाने का जो महान कार्य स्वामी कल्याणदेव ने किया, वो बेमिसाल है। शिक्षा ऋषि ने समाज में समानता की स्थापना के लिए किसान और मजदूरों की भावी पीढ़ी को शिक्षित बनाने का संकल्प लिया।
चिकित्साधिकारी डॉ अक्षय लाल ने कहा कि आजादी के बाद भारत को स्वावलंबी बनाने के लिए स्वामी जी ने गांव और गरीब को शिक्षा से जोड़ा। राजकीय आयुर्वेदिक कालेज उन्हीं के तप, त्याग और सेवा का प्रतीक है। अन्य शिक्षकों ने पुष्प अर्पित कर पदम् भूषण स्वामी कल्याणदेव महाराज को नमन किया।