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बैंक में कैश, लाइनों में धैर्य हुआ खत्म, दिन भर हुआ हंगामा

Thu, 17 Nov 2016 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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बैंक के बाहर हंगामा करते लोग। - फोटो : अमर उजाला
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ज्यादातर बैंकों में कैश की कमी के कारण ग्राहकों में दिनभर निराशा छाई रही। नोट बदलने के लिए धक्का-मुक्की जिंदगी की मुश्किलें और बढ़ा रही है। एसबीआई और पीएनबी की शाखाओं में नागरिकों के नोट बदले गए और नियमानुसार बचत और चालू खातों से भुगतान किया गया। आरबीआई के फरमान के बावजूद केवल बैंक ऑफ महाराष्ट्र में ही नोट तब्दील करने आए ग्राहकों की अंगुली पर स्याही लगाई गई। शहर और देहात के अधिकांश एटीएम बंद पड़े है।      
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500 और 1000 के प्रतिबंधित नोटों को बदलने के लिए बैंकों के पास कैश ही नहीं है। एसबीआई और पीएनबी की शाखाओं के अलावा अधिकांश बैंकों में बुधवार को लोगों को धन नहीं मिला। कैश आने के इंतजार में ग्राहक भटकते रहे। रेलवे रोड और नई मंडी स्थित एसबीआई की मुख्य शाखाओं में उपभोक्ताओं और नागरिकों को भुगतान किया गया। इन बैंकों के एटीएम से भी लोगों को ढाई हजार रुपये का भुगतान मिलता रहा, लेकिन लंबी लाईनों के कारण घंटों का वक्त लगाना पड़ा।

महिलाएं और बुजुर्ग एटीएम की लाईनों में खड़े होने का साहस नहीं जुटा पाए। ज्यादातर बैंकों के एटीएम के शटर भी बंद पड़े है। बैंकों के बाहर लाइनों में धक्का-मुक्की, नोकझोंक से कई बार मुश्किलें आई। पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। शिव चौक पीएनबी पर भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस को मशक्कत करनी पड़ी।
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सेविंग और करंट एकांउट में 500  और 1000 के नोट जमा करने के लिए भीड़ रही। नई मंडी स्थित मुख्य डाकघर, सिटी ऑफिस डाकघर, गांधी कालोनी, सरवट रोड, द्वारकापुरी, रामपुरम, दक्षिणी सिविल लाइन, आनंदपुरी के डाकघरों पर भी नागरिकों ने नोट बदले। मकान ऋण के खातों में बड़ी संख्या में प्रतिबंधित नोटों को जमा कराया जा रहा है। पेन कार्ड के आधार पर लोगों ने एक लाख रुपये से अधिक तक जमा कराए।       

आरबीआई के निर्देशों पर कोर्ट रोड स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में नोट बदलने आए ग्राहकों और नागरिकों की अंगुलियों पर अमिट स्याही लगाई गई। बृहस्पतिवार से दूसरे बैंकों पर भी स्याही लगाने की प्रक्रिया शुरु हो जाएगी। डीएम ने बैंक प्रबंधकों को स्याही व्यवस्था उपलब्ध कराने के निर्देश दिए है।        नोट बंदी का सबसे ज्यादा असर ग्रहणियों पर है। बैंकों पर आई महिलाओं का कहना है कि छोटे नोटों की कमी के कारण घरेलू रोजमर्रा के खर्च भी पूरे नहीं हो पा रहे है। दूध, ब्रेड, चीनी, दाल, चाय पत्ती और फल-सब्जी खरीदने से पहले पर्स देखना पड़ता है।      

घटने के बजाए बढ़ रही है भीड़      
मुजफ्फरनगर। बैंकों पर भीड़ घटने के बजाए लगातार बढ़ रही है। मुख्य दरवाजों पर सिक्योरिटी गार्ड तैनात है और ताले पड़े है। बैंकों की व्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। सुबह आठ बजे से ही बैंकों के बाहर नोट बदलने के लिए नागरिकों की कतारे लग जाती है। बुधवार को कई बैंकों ने सूचना चस्पा कर नगदी नहीं होने की जानकारी दी।

लाईनों में लगे लोगों को निराशा में घर लौटना पड़ा। हर परिवार का एक सदस्य बैंकों में नगदी बदलने के लिए बैंकों के चक्कर काट रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कतें बैंकों से मिल रहे 10 रुपये के सिक्के को लेकर है। लोग सिक्के लेने को तैयार नहीं है। बाजार में सिक्के की स्वीकार्यता को लेकर असमंजस है। किराना की दुकानों, सब्जी ठेलों पर भी सिक्के नहीं चल रहे है।       

चाय और कोल्ड ड्रिंक्स पिलाई      
मुजफ्फरनगर। बैंकों के बाहर नोट बदलने को जूझते लोगों में सद्भावना के भाव से चाय, कोल्ड ड्रिंक्स वितरित किया गया। बालाजी चौक स्थित कॉर्पोरेशन बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, पंजाब एण्ड सिंध बैंक, शिव चौक के पीएनबी और रेलवे रोड के एसबीआई पर गौरव बंसल के नेतृत्व में लाइन में लगे नागरिकों को चाय वितरित की गई। अयूब खान, पीयूष माहेश्वरी, आनंद कुमार, राहुल गर्ग, देवेंद्र कुमार आदि का सहयोग रहा। कई बैंकों पर पेयजल और कोल्ड ड्रिंक्स भी पिलाया गया।      

दुकानदारों की दरियादिली, उधारी के खाते खोले      
मुजफ्फरनगर। 100 और 50 के नोटों की किल्लत के कारण फल, दूध और सब्जी विक्रेता अपने नियमित ग्राहकों को उधार में सामान दे रहे है। नोट बंदी के चलते बदले हालात में बाजार में ज्यादातर फल और सब्जी विक्रेताओं ने जान पहचान के ग्राहकों का उधारी का खाता खोल लिया है। ऐसे ही हालात दाल मंडी, पान मंडी, आलू मंडी, नई मंडी, मीना बाजार और गली-मोहल्लों के बाजारों में है। दुकानदारों की दरियादिली पर लोग सुकून महसूस कर रहे है।      

शादी-विवाह वालों को प्राथमिकता : डीएम      
मुजफ्फरनगर। 30 नवंबर तक होने वाली शादियों के लिए बैंकों में आज से भुगतान की अलग व्यवस्था की जाएगी। शादी कार्ड के साथ अभिभावक पास बुक लेकर सीधे शाखा प्रबंधक से मिल सकते हैं। उन्हें धन निकासी में प्राथमिकता दी जाएगी,

लेकिन खाताधारक आरबीआई के नियमों के मुताबिक एक सप्ताह में केवल 24 हजार रुपये की धनराशि ही खाते से निकाल सकते हैं। इस संबंध में डीएम डीके सिंह ने बैंक प्रबंधकों से बैठक कर निर्देशित किया है। डीएम के मुताबिक जिला सहकारी बैंकों में किसानों के भुगतान के लिए ढाई करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। बृहस्पतिवार से सहकारी बैंकों से किसान अपना भुगतान ले सकते है।       

अभी बना रहेगा छोटे नोटों का संकट      
मुजफ्फरनगर। अग्रणी लीड बैंक के मुख्य प्रबंधक शशि कुमार जैन ने बताया कि पांच सौ के नए नोट अभी जिले के बैंकों को उपलब्ध नहीं हो पाए है। आरबीआई से 2000 के नोट भी एक बार ही जिले को आपूर्ति किए गए है। छोटे नोटों का संकट अभी बना रहेगा। एसबीआई के प्रबंधक मुकुल कुमार चौधरी ने दावा किया कि बैंकों को मांग के अनुरूप धनराशि देने का प्रयास किया जा रहा है। नई मंडी शाखा प्रबंधक दिग्विजय सिंह ने कहा कि जिन ग्राहकों के पास छोटे नोट है, कृपया वे बैंकों में जमा कराएं।       
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