पुरकाजी क्षेत्र के गांव तुगलकपुर में कैंसर रोग से हो रही मौतों से ग्रामीण भयभीत हैं। गांव में दो माह से चार ग्रामीण कैंसर से मर चुके हैं। जबकि कई ग्रामीण कैंसर से पीड़ित हैं।
ग्राम प्रधान प्रताप सिंह ने बताया कि इसी माह एक मई को गांव के 60 वर्षीय महरवान और दो मई को 65 वर्षीय इलमकौर की मौत कैंसर से हुई है। सात मार्च को सहेंद्र और 16 अप्रैल को सोमपाल की भी कैंसर से मौत हो चुकी है। इससे पूर्व भी कुछ ग्रामीणों की कैंसर से मौत हुई।
कई लोग कैंसर के आखिरी स्टेज पर पहुंच जाने से जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं, जिनका दिल्ली, मेरठ और जौलीग्रांट आदि बडे़ अस्पतालों में इलाज चल रहा है।
उनका कहना है कि गांव के निकट एक तालाब है, जिसमें हमेशा गंदा पानी भरा रहता है। इसके अलावा गांव के आसपास ऐसा कुछ नजर नहीं आता, जिससे गांव मे कैंसर रोग फैलने का खतरा पैदा होता हो।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से कई बार गांव के पानी की जांच कराने की मांग की गई, मगर स्वास्थ्य विभाग ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इस संबंध में पुरकाजी सीएचसी प्रभारी डॉक्टर मुकेश कुमार का कहना है कि ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है, फिर भी गांव में जाकर जानकारी की जाएगी।
पानी में हैं भारी अशुद्धियां
गांव तुगलकपुर के ग्राम प्रधान प्रताप सिंह ने रविवार को वाटर टेस्टिंग टीम को बुलाया और गांव के हैंडपंपों की जांच कराई। दिल्ली से आई टीम ने बताया कि पानी का टीडीएस (टोटल डिजाल्व सॉलिड) बेहद ज्यादा है।
आमतौर पर पानी का टीडीएस 50 होना चाहिए, मगर गांव के पानी का टीडीएस 800 तक है, जिसके पीने से आदमी के लीवर पर प्रभाव पड़ता है और कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां हो जाती हैं। इसके अलावा भी गांव के पानी में भारी अशुद्धियां हैं, जिनकी जानकारी के लिए पानी को लैब में भेजकर उसकी जांच कराई जाएगी।
उधर, पिछले छह माह से कैंसर से जूझ रहे 65 वर्षीय रेशमचंद और 70 वर्षीय फुल्लो के परिजनों ने बताया कि रोहतक, सोनीपत शामली आदि में इलाज करा चुके हैं, लेकिन कोई आराम नहीं हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव के बीच में एक तालाब है, जिसमें बरसात के दिनों में पानी भर जाता है और वह पानी घरों में घुस जाता है, उससे भी नलों का पानी दूषित हो रहा है, जिसकी सफाई के लिए कई बार अधिकारियों से मांग की जा चुकी है, लेकिन इस ओर ध्यान हीं दिया जा रहा है।
डॉक्टरों की टीम भेजेंगे : सीएमओ
सीएमओ डॉ. सुुबोध कुमार का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि वहां पर कैंसर से ग्रामीणों की मौत हो रही हैं तो डॉक्टरों की टीम को गांव भेजा जाएगा। मृतकों की केस स्टडी की जाएगी। टीम गांव में पीड़ित मरीजों से भी मिलेगी।
जल निगम से कराई जाएगी पानी की जांच
सीएमओ ने बताया कि कैंसर होने का एक कारण प्रदूषित पानी भी हो सकता है। गांव के पानी का टीडीएस 700-800 होने के बारे में उनका कहना है कि पानी में टीडीएस की मात्रा करीब 100 होनी चाहिए, इससे ज्यादा मात्रा होने से पानी नुकसान देने लगता है।
सबसे पहले पेट और पाचन तंत्र को हानि पहुंचती है। इसके बाद अन्य बीमारी फैलती हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को चाहिए कि वो पानी को उबाल कर और छानकर पिएं। गांव के पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए जल निगम को पत्र भेजकर पानी की जांच कराई जाएगी।