ट्रकों के पहिये थमे, करोड़ों का नुकसान
मुजफ्फरनगर। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध को देखते हुए देश भर में हुए हिंसक प्रदर्शन के कारण ट्रांसपोर्ट का कारोबार प्रभावित हुआ है। अब हालात कुछ सुधरे, तो घने कोहरे और सर्दी ने ट्रकों के पहिये थाम दिए हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट कारोबार बीते दस दिनों से धड़ाम हुआ है। मुजफ्फरनगर में ही करोड़ों रुपयों के नुकसान का अनुमान है।
मुजफ्फरनगर से गुड़, चीनी, पेपर, लोहा, सरिया, रेडिमेड, दवाई का बहुत बड़ा कारोबार है। यहां से इस समान की आपूर्ति दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड आदि प्रांतों में होती है। शहर भर में डेढ़ सौ से अधिक ट्रांसपोर्ट है, जिनके पास दो हजार से अधिक छोटे-बड़े ट्रक हैं। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में बीते दस दिनों से ट्रांसपोर्ट का कारोबार पूरी तरह से प्रभावित है। सीएए को लेकर विभिन्न शहरों में हुए प्रदर्शन के कारण माल का उठान नहीं हो सका, जिससे ट्रकों के पहिए थमे रहे। इस दौरान ट्रांसपोर्ट के कारोबार का करोड़ों रुपयों के नुकसान का अनुमान है। अब हालात कुछ सुधरे मगर ठंड और कोहरा कारोबार में खलनायक बन गए है।
बीस प्रतिशत ही काम रह गया
मुजफ्फरनगर। आनंद मार्केट में एनआर ट्रांसपोर्ट के मैनेजर हरवीर सिंह कहते है कि सभी के कारोबार में ट्रांसपोर्ट की अहम भूमिका है। बीते दस दिनों में कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया। अब माहौल सुधरा है, मगर काम बीस प्रतिशत ही रहा गया है। न्यू कश्मीर ट्रांसपोर्ट के मालिक रामकिशोर का कहना है कि इस कारोबार में ऐसा दौर पहली बार देखा है। काम कुछ नहीं है, अब सर्दी ने भी दोहरी मार दी है। धीमान ट्रांसपोर्ट के मैनेजर संदीप कहते हैं कि देश भर में प्रदर्शन के चलते काम नहीं हो सका, बस कुछ माल उत्तराखंड का मिला। अंबे ट्रांसपोर्ट के मैनेजर सुधीर टीटू कहते हैं कि इस उपद्रव से हमारे अलावा मजदूर तबका भी प्रभावित हुआ है।
पल्लेदारों के पास काम नहीं
मुजफ्फरनगर। ट्रांसपोर्ट पर माल ढुलाई और लदान का काम करने वाले पल्लेदारों के पास भी काम नहीं है। उनकी रोजी रोटी भी प्रभावित हुई है। शेरपुर निवासी गुलफाम, आदिल, सलीम और रामपुरी के अंकित ने बताया कि दस रुपये प्रति क्विंटल माल लोड के हिसाब से पहले मजदूरी पांच सौ रुपये तक पड़ जाती है, अब तो सौ-दो सौ जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।