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सीएए का विरोध संसद में पारित कानून का अपमान

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सीएए के समर्थन में भजन कीर्तन करती महिलाएं - फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। सीएए के समर्थन तथा एनआरसी, जनसंख्या नियंत्रण कानून और समान नागरिक संहिता की मांग को लेकर महिलाओं का भजन कीर्तन 16वें दिन भी जारी रहा। महिलाओं ने हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए सीएए का विरोध करने वालों की बुद्धि शुद्धि के लिए प्रार्थना की।
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महिला संगठन प्रेरणा के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में स्नेहा टंडन और शकुंतला राणा ने कहा कि संविधान के अनुसार भारत की संवैधानिक व्यवस्था के तहत संसद द्वारा बने कानून को न मानना और सड़कों पर उतरकर तोड़फोड़ करते हुए विरोध करना कानून का अपमान है। संसद द्वारा पारित कानून को मानना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। यदि किसी को कानून से आपत्ति है तो उसके लिए कोर्ट के दरवाजे खुले हुए हैं। ललिता प्रजापति, मंजू गुप्ता और डॉ. कांता त्यागी ने कहा कि सीएए के विरोधियों ने दिल्ली और अलीगढ़ में तोड़फोड़ व आगजनी करना किसी भी दशा में सही नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल देश में शांति होने देना नहीं चाहते हैं। वह महिलाओं को मोहरा बनाकर उनसे विरोध प्रदर्शन करवा रहे हैं। इस कानून की आड़ में अन्य कानूनों को लाने से रोकने को सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। सरकार को उपद्रवियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इस मौके पर सपना चौहान, गीता खुराना, निकुंज त्यागी, बबली, रेखा, लक्ष्मी गुप्ता, मिथलेश कश्यप, मनीषा सैनी, मीना तोमर, माया पुंडीर, सीमा धीमान, अंजलि त्यागी, शिवानी, रेणू, ममता शर्मा, सोनम त्यागी, शीला सैनी, पुष्पा गुप्ता, विमला और सुधा सैनी आदि मौजूद रही।
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