अनाथ बच्चों के सामने रोटी का संकट
मुजफ्फरनगर। कांशीराम कॉलोनी के पांच अनाथ बच्चों के लिए कोरोना ने भूख का संकट खड़ा कर दिया है।
कांशीराम कॉलोनी में रहने वाले इन पांचों बच्चों की उम्र सात से 15 साल के बीच है। सात साल पहले इनकी मां पिंकी की मौत हो चुकी है। मां की मौत के बाद पिता रामगोपाल हनुमान चौक पर एक किराये के मकान में रहते हुए मेहनत मजदूरी कर रहे थे। गरीब और आवासहीन होने के कारण उसे खांजापुर की कांशीराम कालोनी में मकान आवंटित हो गया था। चार साल पहले मकान मिलने की प्रक्रिया के दौरान ही रामगोपाल की बीमारी से मौत हो गई। उस समय बड़ी बेटी 11 साल की थी। कुछ दिन आसपास के रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने मदद की, लेकिन बाद में सब छोड़ गए।
13 साल की बड़ी बेटी दूसरों के घरों में बर्तन चौका कर अपने छोटे भाई बहनों का पेट भरने का काम कर रही है। इन बच्चों पर संकट उस समय खड़ा हो गया, जब कोरोना के समय में लोगों ने चौका बर्तन कराना बंद कर दिया। जिला प्रोबेशन विभाग ने हाल ही में अनाथ और बेसहारा बच्चों का सर्वे कराया तो ये सामने आए।
एक माह के राशन की व्यवस्था की
जिला प्रोबेशन अधिकारी मौहम्मद मुशफेकीन ने बताया कि पांच अनाथ बच्चों का मामला काफी संवेदनशील है। सर्वप्रथम हमने इन बच्चों के एक माह के राशन की व्यवस्था कर शनिवार को इनके घर भिजवा दिया है। डीएसओ को कहकर इनका राशन कार्ड बनवाया जा रहा है, जिससे प्रति माह इन्हें गेहूं, चावल आदि राशन मिल सके। इनमें दो लड़की और तीन लड़के हैं। लड़कियों को कन्या सुमंगला योजना का लाभ दिलाया जाएगा। सभी बच्चों का स्कूल में एडमिशन कराएंगे। समेकित बाल संरक्षण योजना में दो बच्चों को शामिल किया जाएगा। इस योजना में एक बच्चे को दो हजार रुपये मिलते हैं। इससे परिवार को चार हजार रुपये महीना मिल जाएगा।