मुजफ्फरनगर। स्पिक मैके की विरासत श्रंखला 2015 के अंतर्गत मणिपुर के पुंग चोलम नृत्य का आयोजन हुआ। लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में मणिपुुर के गुरु याइमा सिंह के नेतृत्व में पुंग चोलम की लास्य और तांडव का सुंदर समन्वय दिखाया गया।
विश्व के अनेक देशों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके गुरु याइमा सिंह ने छात्रों को पुंग चोलम के बारे में विस्तार से बताया। सत्रहवीं सदी में चैतन्य महाप्रभु की प्रेरणा से मणिपुर ही नहीं पूर्वोत्तर राज्यों में वैष्णव संकीर्तन का प्रादुर्भाव हुआ। पुंग चोलम कला विकसित हुई।
इसमें लय ताल के साथ मृदंग वादन में नृत्य के भी पक्षों का मिश्रण एक अद्भुत माहौल पैदा करता है। कृष्ण की प्रिय त्रिभंगी मुद्रा में नृत्य के लास्य एवं तांडव का मनोहारी रूप प्रस्तुत करता है। याइमा सिंह के निर्देशन में रोमेंद्रो सिंह, तोहिबा, प्रमेंद्रा सिंह, भारती सिंह, रोजर सिंह, रोजित सिंह ने मृदंग की लगातार बदलती थाप के साथ हैरतअंगेज नृत्य प्रस्तुत किया।
दर्शकों ने तालियों से कलाकारों का हौसला बढ़ाया। इससे पूर्व दीप प्रज्वलन प्रधानाचार्य भूदेव सिंह, प्रबंध समिति के सुभाषचंद गुप्ता, अवधेश, जयप्रकाश गर्ग, रविंद्र बंसल ने किया। डॉ एसएन चौहान, डॉ बीके त्यागी, सुनीता गौड़, प्रवीण बंसल, अरविंद मित्तल, आरएम तिवारी, अभिनव त्यागी, राहुल सेन, मृदुला, डॉ एनएन पंत, सोनल तिवारी का सहयोग रहा।