मुजफ्फरनगर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट भाजपा-रालोद गठबंधन को रास नहीं आ रही है। 2009 में गठबंधन से पूर्व सांसद अनुराधा चौधरी चुनाव हार गई थी, जबकि इस बार डॉ संजीव बालियान को हार का सामना करना पड़ा। अनुराधा रालोद और बालियान की गिनती भाजपा के बड़े जाट नेताओं में है।
भाजपा ने पश्चिम में रालोद से गठबंधन कर क्लीन स्वीप की रणनीति तैयार की थी। इसके केंद्र में मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट थी। रालोद को इस गठबंधन में दो लोकसभा सीट दी गई थी। इनमें बागपत और बिजनौर शामिल रहीं। हालांकि रालोद ने अपने हिस्से की दोनों सीट जीत ली हैं। जिन दोनों सीटों को लेकर भाजपा ने फोकस किया था, उनमें मुजफ्फरनगर और कैराना सीट थी। भाजपा दोनों सीटों हार गई। मुजफ्फरनगर में भाजपा उतने वोट भी नहीं ले पाई जितने उसे अकेले लड़ने पर मिले थे। उसके लगभग एक लाख वोट कम हो गए।
इससे पहले 2009 में रालोद-भाजपा का गठबंधन हुआ था। तब रालोद के टिकट पर अनुराधा चौधरी मुजफ्फरनगर से चुनाव लड़ी थी, लेकिन बसपा के कादिर राना के सामने उन्हें हार
बिजनौर में दोनों बार जीत गए
मुजफ्फरनगर सीट पर दोनों बार हार मिली, जबकि बिजनौर सीट पर दोनों बार गठबंधन को जीत मिली है। बिजनौर में साल 2009 में गठबंधन से रालोद के संजय चौहान जीते थे। इस चुनाव में उनके बेटे चंदन चौहान जीत गए । बिजनौर की सीट पर यह गठबंधन दोनो बार रास आया है।