मुजफ्फरनगर। विधानसभा चुनाव में जिले की चार सीटों पर हारने वाली भाजपा ने एमएलसी चुनाव में वंदना मुदित वर्मा की जीत से फिर ताकत दिखाई है। सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी एक हजार वोटों का आंकड़ा भी नहीं छू सका।
कुतुबपुर गांव की रहने वाली वंदना मुदित वर्मा तीन बार की जिला पंचायत सदस्य हैं। इससे पहले वह सहकारी बैंक की चेयरपर्सन रहीं। राजनीति में ऊंची उड़ान की लंबे समय से ख्वाहिश रही है। विधानसभा चुनाव में जिले की बुढ़ाना, चरथावल, पुरकाजी सुरक्षित और मीरापुर सीट खोने बाद भाजपा को जोर का झटका लगा था। जिले में मजबूत दिख रहे विपक्ष के सामने भाजपा ने वंदना को प्रत्याशी बनाया था। सहारनपुर, शामली और मुजफ्फरनगर जिले के चुनाव में वंदना वर्मा की जीत से भाजपा फिर मजबूत दिखाई दी है। शामली और मुजफ्फरनगर जिले की नौ में से छह सीट रालोद-सपा गठबंधन के पास है, लेकिन एमएलसी चुनाव में विपक्ष ताकत नहीं दिखा पाया। सपा प्रत्याशी आरिफ जौला को बड़े अंतर से हार का सामना करना पड़ा।
लखनऊ से कुतुबपुर तक बजता रहा डंका
कुतुबपुर गांव के वर्मा परिवार का डंका गांव से लखनऊ तक खूब बजता रहा है। वंदना वर्मा के जेठ स्वर्गीय शशांक शेखर बसपा सरकार में कैबिनेट सचिव रहे हैं। वंदना के पति मुदित वर्मा का लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में रसूख है।