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मोती झील पर्यटन के रूप में विकसित होगी, जल संसाधन मंत्रालय झील में छोड़ेगा नाव      

Tue, 18 Apr 2017 12:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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मोती झील का निरीक्षण करती टीम। - फोटो : अमर उजाला
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पर्दाफाश की अबूझ पहेली बनी मोती झील पर्यटन के रूप में विकसित होगी। प्राचीन इतिहास में इस झील को पांडव पुत्र भीम द्वारा बनाया जाना बताया जाता है। झील में पर्यटन की संभावनाओं को लेकर केंद्रीय जल बोर्ड देहरादून की एक टीम उप मंडलीय अभियंता हरिप्रसाद के नेतृत्व में यहां पहुंची। टीम ने झील में नाव उतारकर गहराई आदि की जानकारी ली और सरकारी रिकार्ड में झील का रकबा देखा।       
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केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान ने कुछ दिन पूर्व शामली रोड स्थित मोती झील का निरीक्षण किया था। झील का विस्तार और सौंदर्यीकरण के लिए उन्होंने केंद्रीय जल आयोग को निर्देशित किया। बालियान के निदेश पर सेंट्रल वाटर कमीशन की टीम मोती झील पर पहुंची। क्षेत्रीय लेखपाल और नायब तहसीलदार को भी मौके पर बुलाया गया। रिकार्ड में झील का रकबा देखा गया। झील की प्राचीनता को देखते हुए राजस्व अधिकारियों को पुराना रिकार्ड दिखाने के लिए कहा गया। 

मोती झील को लेकर कहावत है कि यह आज तक कभी सूखी नहीं है। लोग इसे पर्दाफाश के नाम से जानते हैं। यदि कोई इसमें गिर जाता है तो वह तीन चार दिन बाद ही तैरता हुआ बाहर आता है। झील में अंदर ही अंदर पानी का स्रोत होने का अनुमान है। इंजीनियर हरिप्रसाद के नेतृत्व में आई टीम ने बोट के माध्यम से झील की गहराई नापने की कोशिश की।
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टीम ने डॉ. वशिष्ठ भारद्वाज से पर्यटन की संभावनाओं पर भी चर्चा की। झील के इतिहास को जानने का भी प्रयास किया। यह टीम अपनी रिपोर्ट बोर्ड को भेजेगी। इसके बाद ही झील को लेकर कार्य योजना तैयार होगी। इस अवसर पर केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री संजीव बालियान के भाई विवेक बालियान, जिला पंचायत सदस्य हरेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे। 
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