भौराखुर्द का किसान विकास बालियान खेत में कर रही है सह फसली खेली।
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मुजफ्फरनगर। जिले के किसान गन्ने के साथ सहफसली खेती भी कर रहे हैं। जैविक खेती करने वाले भौराखुर्द के किसान विकास बालियान ने गन्ने में लौकी, तुरई और भिंडी की खेती की है। किसान का कहना है कि उसे गन्ने की खेती में अतिरिक्त आय हो रही है।
किसान विकास का कहना है कि उसकी पत्नी को गंभीर बीमारी थी, उसके मन में यह बात आई कि बीमारी का एक कारण खेती में प्रयोग किये जा रहे कीटनाशक और रासायनिक उर्वरक भी हैं। तभी से उन्होंने खेती में इन रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशक रसायनों के बजाय जैविक विधि से फसल उगानी शुरू कर दी। किसान ने बताया कि पहले तो गांव के अन्य किसानों ने उनका उपहास किया किंतु अब वे लोग भी समझ चुके हैं कि जैविक खेती से उत्पादित फसल की महत्ता क्या है। जैविक विधि से जो गन्ना खेत में खड़ा है उसकी पैदावार थोड़ी कम अवश्य हैं किंतु उसकी वैल्यू ज्यादा है। किसान द्वारा इस गन्ने का जैविक गुड़ उत्पादन किया जाता है, जिससे उन्हें अच्छी आय हो रही है। इसी प्रकार गन्ने की सहफसली के रूप में लगाये गए जैविक लौकी और तुरई के अच्छे दाम मिल रहे हैं। लोग खेत से ही खरीद कर ले जा रहे हैं।
शुद्धता की बढ़ रही डिमांड
मुजफ्फरनगर। डीसीओ डॉ आरडी द्विवेदी का कहना है कि लोग अपनी पुरानी पद्घति पर लौट रहे है। हर आदमी शुद्ध चीज चाहता है। जो लोग बिना उर्वरक और कीटनाशक के खेती कर रहे है, उनकी फसलों की डिमांड बढ़ रही है। आने वाले समय में इसकी मांग ओर अधिक बढे़गी।