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अटेंशन प्लीज! दोहरीकरण का 40 फीसदी कार्य पूरा      

Mon, 22 May 2017 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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ट्रैक से गुजरती ट्रेन।
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वर्ष 2016-17 में रेलवे का दोहरीकरण कार्य पूरा होना था, लेकिन रेलवे निर्माण विभाग की सुस्ती के कारण अभी तक चालीस फीसदी कार्य किया जा सका है। ऐसे में अनुमान है कि दोहरीकरण का कार्य इस वर्ष पूरा नहीं हो सकेगा। हालांकि रेलवे की ओर से स्टेशन पर बोर्ड टांग कर लोगों को सचेत किया गया है।      
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मेरठ से मुजफ्फरनगर तक करीब 55.47 किलोमीटर तक आंशिक रेलवे लाइन का दोहरीकरण होना है। इसके लिए रेलवे निर्माण विभाग को वर्ष 2012-13 में प्रोजेक्ट दिया गया। लगभग 377.44 करोड़ की लागत से आंशिक दोहरी रेलवे लाइन बिछाई जानी है। इस कार्य को पूरा करने के लिए निर्माण विभाग को 2016-17 के वित्तीय वर्ष तक का समय दिया गया।

ताज्जुब की बात यह है कि रेलवे विभाग के हाथ में कार्य होने के बावजूद भी अभी तक 40 फीसदी कार्य निपट सका है। बाकायदा, रेलवे निर्माण विभाग ने स्टेशन पर कार्य की प्रगति का बोर्ड टांग कर लोगों को सचेत किया है। स्टेशन अधीक्षक विपिन कुमार त्यागी ने बताया कि दोहरीकरण कार्य चल रहा है। इस कार्य को रेलवे का निर्माण विभाग देख रहा है। पूर्व में कार्य रुका था, लेकिन अब सब स्थानों प्रारंभ है।      
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 नौ स्टेशन पर होगा निर्माण कार्य      
मुजफ्फरनगर। मेरठ सिटी स्टेशन से चलकर निर्माण कार्य जनपद तक नौ स्टेशन पर होगा। इसके लिए कई स्थानों पर स्टेशन घर भी बदला जाएंगे। हालांकि निर्माण कार्य खतौली क्षेत्र में चल रहा है। यहां रेलवे लाइन नंबर 3 को बंद कर दिया गया है। क्योंकि रेलवे लाइन नंबर तीन पर स्टेशन की साइड का कार्य किया जा रहा है। 55.47 किलोमीटर में मेरठ सिटी, मेरठ कैंट, पावली खास, दौराला, सकौती, खतौली, मंसूरपुर, नरा-जड़ौदा और मुजफ्फरनगर तक कार्य होगा।       

कई माह तक बंद रहा है कार्य      
मुजफ्फरनगर। खतौली क्षेत्र में भैंसी, सोंटा, मंसूरपुर, तिगाई, टबीटा, मढकरीमपुर समेत दर्जनों गांवों के किसानों ने दोहरीकरण पर ब्रेक लगा दिया था। किसानों ने अधिग्रहीत की गई भूमि का सही मुआवजा न मिलने के चलते निर्माण कार्य नहीं होने दिया। कई महीनों तक कार्य नहीं हो सका। इसको लेकर रेलवे विभाग ने किसानों का मान मनव्वल किया, तब जाकर निर्मार्ण कार्य शुरू हो सका है।       

दोहरीकरण का लाभ      
रेलवे के दोहरीकरण से ट्रेनों के संचालन में समयबद्धता होगी। सिंगल लाइन होने के कारण एक्सप्रेस, सुपर फास्ट आदि ट्रेनों को निकालने के लिए छोटे रूट की ट्रेनों को अतिरिक्त रूप से स्टॉप देना पड़ता है। ट्रेनें लेट होती है। दोहरीकरण से समय पर ट्रेनों की आवाजाही होगी।       
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