रतनपुरी। जिन गांवों में शुद्ध पेयजल के लिए ओवरहैड टैंक की सबसे ज्यादा जरूरत थी, वहीं पर निर्माण नहीं हुआ। जहां निर्माण हुआ, वहां से हर घर तक आपूर्ति नहीं पहुंची। क्षेत्र से गुजर रही काली नदी के प्रदूषित जल के कारण रामपुर, घनश्यामपुरा, समौली, डबल, इंचौड़ा, कितास, रतनपुरी, मंडावली खादर सहित अन्य गांव के ग्रामीण बीमारियां झेल रहे हैं। काली नदी में बह रहे प्रदूषित जल के कारण इन गांवों में शुद्ध पेयजल की विकट समस्या है। घरों में लगे हैंडपंपों से निकलने वाला जल प्रदूषित हो चुका है।
कैंसर, हेपेटाइटिस और त्वचार के रोग
ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषित जल के कारण गांवों में कैंसर का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इसके अतिरिक्त हेपेटाइटिस और त्वचा संबंधी रोग भी पैर पसार रहे हैं। डबल और रतनपुरी के दर्जनों लोग कैंसर के कारण काल का ग्रास बन चुके है।
कैंसर से चल रही लड़ाई
डबल निवासी रुपीदमन पिछले करीब बीस वर्ष से जीभ के कैंसर से लड़ रहे हैं। फिलहाल दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है। गांव के बिनेश करीब तीन वर्ष से कैंसर से जूझ रहे हैं। सतीश को गले का कैंसर है। रतनपुरी निवासी ममता भी पिछले करीब पांच वर्ष से कैंसर से पीड़ित है।
प्रस्ताव से आगे नहीं बढ़ी टंकी
काली नदी के किनारे बसे अधिकांश गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए पानी की टंकी उपलब्ध नहीं हैं। डबल के ग्राम प्रधान जीतू सिंह ने बताया कि गांव में टंकी का प्रस्ताव पास हो चुका है, लेकिन अभी तक निर्माण प्रारंभ नहीं हो सका है।
डबल निवासी ईश्वर त्यागी बताते हैं कि छह वर्ष पहले मेरठ की नीर फाउंडेशन की ओर से गांव में वाटर फिल्टर वितरित किए गए थे। मगर, नदी के दूषित पानी की वजह से वाटर फिल्टर ज्यादा कारगर साबित नहीं हो सके। कुछ दिन बाद ही वे ठप हो गए।
रतनपुरी निवासी बुजुर्ग चरतु सिंह बताते हैं कि करीब दो दशक पहले तक इस नदी का पानी बिल्कुल साफ हुआ करता था। उस समय खतौली गंग नहर में से कुछ पानी काली नदी में डाला जाता था। पिछले कई वर्षों से यह व्यवस्था पूर्णतया बंद है। फैक्टरियों का प्रदूषित कचरा और पानी काली नदी में गिरने के कारण अब इसका पानी पूर्ण रूप से जहर बन चुका है।
डबल निवासी शिवकुमार त्यागी का कहना है कि काली नदी में प्रदूषण की वजह से गांव के हैंडपंपों में से दूषित पानी ही निकलता है। इसके कारण लोगों को सबमर्सिबल का सहारा लेना पड़ रहा है।
खानुपुर रेलपार में 15 वर्षों से पानी का इंतजार
मंसूरपुर। 15 वर्ष पहले गांव खानुपुर में करोड़ों रुपये की लागत से पानी की टंकी का निर्माण कराया था। निर्माण के बाद कई वर्षों तक लाइन बिछाने का कार्य अधर में लटका रहा। कई वर्षों बाद अब लगभग 1000 लोगों ने कनेक्शन ले लिए हैं, लेकिन उनके घरों तथा कभी पानी पहुंच जाता है और कभी नहीं। गांव का एक बहुत बड़ा क्षेत्र ऐसा है, जहां आज तक भी पाइप लाइन नहीं बिछाई गई है। गांव के पूर्वी भाग से रेलवे लाइन गुजर रही है। रेलवे विभाग ने पानी के पाइप पटरी के नीचे से गुजारने की अनुमति नहीं दी थी। इस कारण रेल पार क्षेत्र में आज तक 1000 लोगों तक पानी की पाइप लाइन नहीं जा सकी है।
बजट बन रहा है समस्या
खानूपुर के प्रधान राजीव धनगर का कहना है कि रेलपार अभी तक पानी की पाइप लाइन नहीं गई है। दूसरे क्षेत्र में जिन लोगों ने कनेक्शन लिए है, वहां तक पानी जा रहा है। टंकी संचालित करने में आर्थिक समस्या आ रही है। ऑपरेटर की तनख्वाह देने तथा पाइप लाइनों के रखरखाव में पैसे की आवश्यकता है। पूर्व प्रधान कुलवीर का कहना है कि जल निगम की लापरवाही के चलते ही अभी तक सभी को कनेक्शन नहीं मिले हैं। लाइनपार निवासी उमेश राठी का कहना है कि विभाग को लाइनपार क्षेत्र में भी पानी की लाइन बिछा कर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना चाहिए या दूसरी टंकी का निर्माण करा कर पानी उपलब्ध कराया जाएं।
शुद्ध पेयजल नहीं मिल रहा हमें करें कॉल
आपके घरों तक अगर शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच रहा है। ओवरहेड टैंक का लाभ नहीं मिला। कनेक्शन दिया गया है, लेकिन पानी अब तक नहीं पहुंचा तो हमसे मोबाइल/व्हाट्सएप नंबर 8954893110 पर संपर्क करें।