वायु प्रदूषण बढ़ने से लोगों की परेशानियां भी बढ़ गई हैं। जहरीली हवा में लोग सांस लेने को विवश हैं। उधर, स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस संबंध में अधिकारी मौन हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस संबंध में नोटिस भेज रहा है। लेकिन अभी तक सख्त कार्रवाई नहीं की गई है।
दिल्ली और एनसीआर के जनपदों में प्रदूषण को लेकर स्थिति खराब है। सर्दियां शुरू होते ही प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगता है।
मुजफ्फरनगर भी इससे अछूता नहीं है। यहां पर प्रदूषण का स्तर बहुत खराब है। जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) लगातार बढ़ता जा रहा है। शुक्रवार को यह 360 था। इसके बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कार्य केवल विभागों और संस्थाओं को नोटिस जारी करना मात्र रह गया। इससे आगे कार्रवाई नहीं बढ़ती है।
खुले में जला रहे कूड़ा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा विभागों को प्रदूषण रोकने के निर्देश जारी किए जाते हैं। वायु प्रदूषण में धुएं की सबसे बड़ी भूमिका है। एनजीटी ने कूड़ा जलाने पर रोक लगा रखी है। नगर पालिका की जिम्मेदारी है कि किसी भी तरह का कूड़ा जलाया न जाए। लेकिन शहर में जहां तहां कूड़े में आग लगाई जा रही है। नगर स्वास्थ्य अधिकारी आरएस राठी का कहना है कि शहर में कूड़ा नहीं जलने दिया जाएगा। यदि कहीं पर कूड़ा जलाया जा रहा है तो कार्रवाई की जाएगी।
ढककर नहीं हो रहे निर्माण
वायु प्रदूषण में सबसे ज्यादा धूल के कण होते हैं। यह निर्माण कार्यों से उड़ते हैं। भवनों का निर्माण इस तरह होना चाहिए कि धूल न उड़े। निर्माण स्थल को ढका जाना चाहिए। लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं देता। इसके अलावा सड़कों की हालत भी बेहद खराब है। पानीपत-खटीमा हाईवे की हालत बेहद खराब है। गड्ढों से उड़ती धूल पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रही है।
धुआं उगल रहे पुराने वाहन
एनजीटी ने पुराने डीजल एवं पेट्रोल वाहनों पर रोक लगा दी है। इसके बावजूद शहर में बड़े पैमाने पर पुराने वाहन चल रहे हैं। वाहनों से फैल रहे प्रदूषण को रोकने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने परिवहन विभाग को प्रदूषण फैला रहे वाहनों पर रोक लगाने के लिए पत्र लिखा है। लेकिन इसका भी कुछ असर नहीं हो रहा है। एआरटीओ प्रवर्तन विनीत कुमार का कहना है कि वाहनों की नियमित चेकिंग की जाती है। यदि कोई वाहन मानकों को पूरा नहीं करता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
उद्योगों को नोटिस भेजे
जिले में बड़े पैमाने पर उद्योग जहरीला धुआं उगल रहे हैं। इसके बावजूद बोर्ड की कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित है। नोटिस के बाद स्थिति में थोड़ा बहुत सुधार होता है। लेकिन स्थिति फिर वही हो जाती है।
बीते पांच दिनों में एक्यूआई
दिनांक एक्यूआई
21 दिसंबर 360
20 दिसंबर 368
19 दिसंबर 370
18 दिसंबर 350
17 दिसंबर 313
वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का मानक
एक्यूआई मानक
0-50 अच्छा
50-100 संतोषजनक
101-200 मध्यम
201-300 खराब
300-400 बहुत खराब
400 से ज्यादा गंभीर
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्रदूषण की मानीटरिंग करता है। विभागों की जिम्मेदारी है कि प्रदूषण को रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई करें। इन विभागों को पत्र भेजकर निर्देश भी जारी किए जाते हैं। बोर्ड भी अपने स्तर से कार्रवाई करता है।- डीसी पांडेय, सहायक वैज्ञानिक, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।