मुजफ्फरनगर। आज राष्ट्रीय वन शहीद दिवस है। यह दिन पर्यावरण के रक्षकों को समर्पित है। इस समर्पण में अपनी आहुति देने के लिए कक्षा 12 की छात्रा अविशी ने एक कोशिश की है। उनका प्रयास है कि प्रकृति की देन का अधिक से अधिक सदुपयेाग हो और वह व्यर्थ न जाए। उन्होंने मंदिर में चढ़ाए गए फूलों की सुगंध और गन्ने के बचे रेशे से पाउडर बनाकर अगरबत्ती तैयार की है। नारायणी नाम की संस्था के जरिए कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग भी तैयार किया है।
वह इस वर्ष एमजी वर्ल्ड विजन में 12वीं की छात्रा है। उन्होंने बताया कि मंदिरों में फूलों को चढ़ाने के बाद फेंका ही जाता है। यह देखकर मन काफी व्यथित होता था कि फूल और पत्तियां बेकार जा रही हैं। इनके सदुपयोग के लिए इंटरनेट पर काफी सर्च करने के बाद अगरबत्ती बनाने का आइडिया मिला। फूलों को पाउडर में बदल लेना तो आसान था पर इसे अगरबत्ती बनाने के लिए काफी दिमागी कसरत करनी पड़ी।
वह बताती हैं कि पापा वैभव गोयल से बात की तो उन्होंने इसका प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया। गर्मी की छुटिटयों में कन्नौज से ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग के बाद अगरबत्ती में चारकोल जैसे हानिकारक पदार्थ का प्रयोग न करके गन्ने के रेशे और अन्य बीजों का पाउडर अगरबत्ती बनाने में प्रयोग किया। इन पदार्थों का प्रयोग करने से अगरबत्ती का धुआं भी हानिकारक नहीं होता।
प्रधानाचार्या डॉ. मृणालिनी अनंत ने बताया कि नारायणी के लिए अविशी की दृष्टि साहसिक और विचारशील है। उन्होंने मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले प्रसाद से उत्पन्न कचरे को नई जिंदगी देने का एक तरीका ढूंढा है। उनकी यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय महिला कारीगरों के लिए भी रोजगार का एक जरिया भी है।