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लंबे इंतजार के बाद स्नेहलता को मिल गया इंसाफ

Tue, 13 Mar 2018 12:04 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
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justice - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)। जंग लगी व्यवस्था का खामियाजा करीब दस साल तक महिला स्नेहलता को भुगतना पड़ा। प्रसव के दौरान डॉक्टर की लापरवाही  के कारण महिला स्नेहलता की जिंदगी तबाह हो गई। आर्थिक तंगी में जूझता परिवार न्याय के लिए दर-दर भटका, लेकिन इलाज तो दूर सुनवाई तक के लिए कोई राजी नहीं हुआ। आखिरकार अदालत की चौखट पर चिकित्सकों की अमानवीयता को रखना पड़ा।
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दुश्वारियां यहां भी कम नहीं रही। कसूरवार विभाग के अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को धमकाया तक। महिला स्नेहलता ने न्याय की जंग लड़ने के लिए आशियाना गिरवी रखकर स्वास्थ्य विभाग के ताबूत में आखिरी कील ठोकी। मुजफ्फरनगर की
स्नेहलता और मऊ के सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार सिंह की जनहित याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए प्रदेश की बदहाल चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के लिए कई अहम निर्देश दिए हैं। लंबे इंतजार के बाद जो न्याय मिला है, वह प्रदेश के लिए नजीर बन गया है।
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मूलरूप से गांव गंगदासपुर निवासी कंवल सिंह अपने परिवार के साथ ससुराल पुरकाजी के गांव झबरपुर में रहता है। आर्थिक हालात सही नहीं होने के कारण परिवार गांव शकरपुर के ईंट के भट्ठे पर मजदूरी करता है। वाकया, वर्ष 2007 में बेटी आकांक्षा के जन्म के साथ शुरू हुआ। स्नेहलता की डिलीवरी पुरकाजी के स्वास्थ्य केंद्र पर हुई। प्रसव के दौरान ड़ॉक्टर की लापरवाही से स्नेहलता का जीवन तबाह हो गया।

प्रसव के दौरान एएनएम गीता शर्मा भी मौजूद थी। आपरेशन में लापरवाही के कारण स्नेहलता को फेच्युला की बीमारी हो गई, जिसके इलाज के लिए मेरठ, मुजफ्फरनगर के साथ कई स्थानों पर अस्पतालों में धक्के खाए, लेकिन सिस्टम ने हर जगह दुत्कार दी। जितनी दुत्कार मिली, स्नेहलता उतनी ही मजबूत होती गई।

अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए उसने आशियाना गिरवी रखा, बच्चों की पढ़ाई छुड़ानी पड़ी। न्याय की आस में परिवार टूटा तो एनजीओ का सहारा मिला। दंपति ने स्वास्थ्य विभाग को उसके कृत्य के लिए कसूरवार ठहराने और अन्य महिलाओं को इससे बचाने की ठान ली, जिस पर कंवल सिंह ने स्नेहलता के नाम से वर्ष 2009 में एक याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की।

बीते करीब दस साल से स्नेहलता अपनी जंग लड़ती रही, जिसे अब हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। इसके साथ ही सिस्टम को भी झकझोर दिया है। हाईकोर्ट ने चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के लिए कई अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे फिर से किसी महिला को ऐसी परिस्थिति से न गुजरना पड़े। इससे जिले से लेकर लखनऊ तक विभाग और अफसरों में हड़कंप मचा है।

वहीं, वर्ष 2007 में पुरकाजी अस्पताल पर तैनात रहे एसीएमओ डॉ बीके ओझा ने बताया कि मामले को बेवजह तूल दिया गया। महिला की डिलीवरी हुई थी, जिसके बाद उसे परेशानी बन गई थी। विभाग ने उसकी हरसंभव मदद की है, हालांकि हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या निर्णय दिया है, वह उनके पास नहीं आ सका है।

चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के आदेश ः इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस अजित कुमार की खंडपीठ से महिला स्नेहलता को इंसाफ मिला। दोनों जनहित याचिकाओं पर फैसला सुनाते हए हाईकोर्ट ने चिकित्सा व्यवस्था में सुधार के लिए स्वास्थ्य विभाग के महकमे को निर्देश दिए हैं।
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