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गंगा स्नान मेले की प्रशासन को चिंता नहीं     

Fri, 04 Nov 2016 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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शुक्रताल में गंगाघाट पर फैली गंदगी। - फोटो : अमर उजाला
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मोरना में पौराणिक तीर्थ शुक्रताल में कार्तिक गंगा स्नान मेले की तैयारियों की प्रशासन को कोई चिंता नहीं है। 10 से 15 नवंबर तक शुकतीर्थ में गंगा तट क्षेत्र में तीर्थ यात्रियों का डेरा रहेगा। मुख्य स्नान 14 नवंबर को है। जिला पंचायत और प्रशासन की सुस्ती की वजह से यहां अव्यवस्था का आलम है।       
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शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने 50 के दशक में महाभारतकालीन पावन भूमि शुक्रताल में गंगा स्नान मेले का शुभारंभ कराया था। प्रतिवर्ष यहां चार गंगा स्नान मेले लगते हैं। फिलहाल कार्तिक गंगा स्नान मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासन की उपेक्षा दिख रही है। गंगा घाट की ओर स्वामी कल्याणदेव तिराहे से पहले सड़क के बाईं ओर दूर तक गोबर फैला है। मार्ग के यात्री टीन शेड भी बदहाल हैं, जिनमें तीर्थ यात्री नहीं बैठ पाते। मुख्य गंगा घाट पर कूड़ा कचरा फैला है। 

नक्षत्र वाटिका से सच्चा प्रकाश आश्रम तक सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण है। पथ प्रकाश की व्यवस्था भी अधूरी पड़ी है। गंगा क्षेत्र में बिजली के खंभे लगा दिए गए हैं, लेकिन लाइटें अभी तक नहीं लग पाई हैं। सबसे ज्यादा चिंता मेला दुकानदारों की है। जिस क्षेत्र में मेला सजता है, वहां की सड़कें अधूरी हैं। विश्वकर्मा मंदिर से दंडी आश्रम और हनुमतधाम की ओर की सड़क के अधूरे निर्माण पर एमडीए का ध्यान नहीं है।
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14 अक्तूबर को मेले के संदर्भ में जिला पंचायत के गेस्ट हाउस में हुई बैठक में सड़क को तत्काल पूरा कराए जाने का आश्वासन अधिकारियों ने दिया था। पांच दिन बाद जिले के देहात से श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और बुग्गियों से शुक्रताल पहुंचने लगेंगे। जिला पंचायत के जेई अरविंद कुमार ने बताया कि सफाई व्यवस्था के लिए भौकरहेडी, मीरापुर और जानसठ पंचायतों को लिखा गया है, लेकिन अभी तक कर्मचारी नहीं पहुंचे हैं।        
  
शुकदेव सेतू पर जान का खतरा      
शुक्रताल। फिल्म सुल्तान में गंगा तट पर बने श्रीशुकदेव सेतू पर अभिनेता सलमान खान ने अपना स्कूटर चलाते हुए शूटिंग की थी, वह बदहाल है। किनारों की रेलिंग टूट चुकी है। ऐसे में गंगा स्नान के वक्त भीड़ को सुरक्षित रख पाना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर बनेगा। वैसे भी तट के दोनों ओर रेतीले मैदानों में श्रद्धालु तंबुओं की नगरी बसा लेते हैं।        
   
17 लाख का बजट, फिर भी उपेक्षा      
शुक्रताल। जिला पंचायत में मेले का बजट 17 लाख 2400 रुपये निर्धारित किया गया है। पंचायत अध्यक्ष आंचल की मौजूदगी में एएमए डॉ. नूतन शर्मा ने सभी विभागों की जिम्मेदारी तय की थी। लापरवाही ऐसी है कि पांच दिन पहले तक मेले को लेकर कोई अधिकारी और कर्मचारी गंभीर नहीं है। वैसे भी जानलेवा बुखार के चलते मेले में सफाई व्यवस्था, मच्छरों से निदान और शुद्ध पेयजल जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अभी तक कोई सुध नहीं ली है।
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