खतौली। दश लक्षण महापर्व को मनाने के लिए नगर के नौ जैन मंदिरों में धर्मावलंबियों ने जिनेंद्र भगवान का अभिषेक व पूजन किया। एक सितंबर तक चलने वाले पर्यूषण पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। यह आत्मजागरण का समय है। भक्तगण अष्ट द्रव्य से अर्ध्य समर्पित करते हुए पूजा अर्चना कर रहे हैं।
ऑनलाइन धर्मचर्चा के माध्यम से कल्पेंद्र जैन ने बताया कि दशलक्षण पर्व के अंतर्गत पांचवां नियम आता है, झूठ का त्याग करना। सदैव सत्य वचन बोलने चाहिए। सत्य बोलने की आदत कई अवगुणों से बचा सकती है। सत्य से ही अहिंसा की रक्षा होती है। सत्यता और असत्यता हमारे अभिप्राय से प्रकट होती है। सत्य वह नौका है, जिससे इस भव सागर से पार किया जा सकता है। सत्य आत्मा का स्वभाव है, धर्म है। सत्या को पा लेने का अर्थ है, परमात्मा को पा लेना। ऐसा बोले जो सुनने वाले के लिए हितकारी है। किसी को कष्ट पहुंचाने वाला न हो। वाणी एक दूसरे को जोड़ती है। सत्य को पाने के लिए मन को पवित्र बनाना होगा। इस अवसर पर अतुल, विनीत, डीके जैन, नीरज, विनोद, वैभव, अंकित, निशांत, कमल, गौरव, अखिलेश, दीपक, शशांक, अनिल, सतेंद्र, अरविंद, सुनीता, आदेश बाला, स्नेह, अंजू, संतोष, डा. ज्योति, शकुंतला, पायल, सरला, आयुषी, रीतू, रजनी, निधि, रविता, आभा आदि शामिल रहे।