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आज भी याद आती हैं इंदिरा जी की बातें

Sun, 20 Nov 2016 12:11 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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राष्ट्रपति भवन में इंदिरा जी से बात करते स्वामी कल्याणदेव। फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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जगेंद्र उज्ज्वल      
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मुजफ्फरनगर। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी राजनीतिज्ञ नेतृत्व क्षमता और दृढ़ व्यक्तित्व से अमिट पहचान बनाई थी। भारत में ही नहीं, बल्कि विश्व पटल पर उनकी धाक जमी। 100वें जन्म दिवस पर इंदिरा की बातें कुरेदी गईं तो जादुई करिश्मे की धनी पंडित नेहरू की बेटी की यादें लोग अभी भी भूल नहीं पाए हैं।      

वीतराग स्वामी कल्याणदेव के निष्काम सेवा भावी जीवन ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को प्रभावित किया। गांधी पॉलीटेक्निक के पूर्व प्राचार्य रामपाल सिंह बताते हैं कि वर्ष 1982 में जब राष्ट्रपति भवन में शिक्षा ऋषि को अमूल्य राष्ट्र सेवा के लिए पदमश्री से अलंकृत किया गया, तब पीएम इंदिरा स्वयं स्वामी जी के पास आई और उनका आशीर्वाद लिया। स्वामी कल्याणदेव ने उन्हें शुकतीर्थ का प्रसाद और साहित्य भेंट किया।       
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वर्ष 1977 के संसदीय चुनाव में कांग्रेस केेंद्र की सत्ता से हट गई थी, जिसकी वजह से पार्टी में कलह बढ़ा और कांग्रेस विभाजित हो गई। प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्य उमादत्त शर्मा बताते हैं कि तब जिले के शीर्ष राजनीतिज्ञ वीरेंद्र वर्मा ने इंदिरा का साथ दिया और संगठन को नई शक्ति दी। 31 मार्च, 1978 को वर्मा के आग्रह पर शहर के एसडी इंटर कॉलेज के मैदान में इंदिरा गांधी की सभा हुई थी।

ग्रामीणों ने एक लाख रुपये का चंदा एकत्रित कर उन्हें भेंट किया था। उनकी नेतृत्व क्षमता अद्भुत और व्यक्तित्व विराट था। सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक अवतार नारायण कौल ने अपनी पुस्तक झरोखे से में इंदिरा गांधी के व्यक्तित्व की अनूठी बातों का जिक्र किया है। कौल के मुताबिक वर्ष 1970-71 की बात है। मैं लखनऊ में इंटेलीजेंस ब्रांच में एसपी सिक्योरिटी था। गोरखपुर एयरोड्रम पर मुझे उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी मिली। वहां से हेलीकॉप्टर द्वारा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी बस्ती पहुंचीं। सभा खत्म करके हम हेलीपैड पहुंचे तो डीआईजी सुरक्षा एचके कर के निर्देश पर आगे के रास्ते में उनके हेलीकॉप्टर में मुझे सुरक्षा का जिम्मा दे दिया गया। जैसे ही हेलीकॉप्टर उड़ा तो वे पट्टी से अपनी आंखों को ढक कर सो गईं। 
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हेलीकॉप्टर की तेज आवाज में वह अपने स्टाफ से कागज पर लिख कर बातें करती थीं। यदि सफर लंबा है तो वह अंग्रेजी अखबार की वर्ग पहेली को सुलझाने में उलझी रहती थीं। बस्ती से हम मिर्जापुर की जनसभा में पहुंचे थे। कई दिन पीएम इंदिरा के साथ रहने का अवसर मिला। उन्होंने सहारनपुर, रुड़की और मेरठ में जनसभाएं की। मेरठ   में शाम को उनकी आखिरी बैठक हुई, जहां से वह कार से दिल्ली चली गई।      
 
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