मोरना। कथा व्यास हरिभाऊ नेतिलकर ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा संस्कारों से परिपूर्ण है। भागवत में जन्म से लेकर मृत्यु तक के लिए कई संस्कार बताए गए हैं। संस्कारों से ही श्रेष्ठ समाज का निर्माण होता है।
शुकतीर्थ के शुकदेव आश्रम में कथा व्यास ने कहा कि इन संस्कारों का पालन करने से मनुष्य जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। संस्कारों से मनुष्य का नैतिक उत्थान होता है और उसका व्यक्तित्व पूर्ण रूप से विकसित होता है। मनुष्य बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से सुसंस्कृत बनता है। संस्कारों से मनुष्य की पाशविकता परिष्कृत होकर मानवता में बदलती है। मनुष्य को यह अनुभूति होती है कि संपूर्ण जीवन ही आध्यात्मिक साधना है। संस्कारों के समय की जाने वाली धार्मिक क्रियाएं व्यक्ति को जिम्मेदारियों का एहसास कराती हैं। संवाद