शाहपुर। खाप पंचायतों का वजूद खतरे में है। खाप पंचायत में फिजूलखर्ची का रोक लगाने की पैरवी करने वाले बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत दो दिन बाद ही पलट गए। वह एक तेरहवीं रस्म में शामिल हुए और भोज भी किया। ऐसे में सवाल यह है, पंचायतें जनमानस के बीच अपने फैसलों को कैसे लागू करा पाएंगी।
18 नवंबर को सोरम में पूर्व सर्वखाप मंत्री स्व. कबूल सिंह की जयंती पर सर्वखाप पंचायत हुई थी। नरेश टिकैत ने भरी पंचायत में मृत्युभोज पर भी आपत्ति जताई थी। यह भी कह दिया था कि जिस शादी में बैंडबाजा बजेगा, कन्यादान नहीं करेंगे। गुरुवार को अपनी बात से पीछे हटते दिखाई दिए। रसूलपुर जाटान में तेरहवीं रस्म के निमंत्रण पर टिकैत लाव लश्कर के साथ पहुंचे। बिना किसी झिझक भोज भी किया। कार्यक्रम में लगभग ढाई बजे पहुंचे टिकैत के पंचायत में बयान को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चाएं थीं। देरी से पहुंचने से पहले आयोजक उनके नहीं आने को पंचायत का असर मान रहे थे। उनके पहुंचते ही चर्चाओं पर विराम लग गया।
पंचायत में सुझाव दिए थे: टिकैत
शाहपुर। चौधरी नरेश टिकैत ने इस बारे में पूछे गए सवाल पर अपनी सफाई पेश की। कहा कि विवाह में फिजूलखर्ची और मृत्यु भोज सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई थी। सुझाव दिए गए थे। यह मुद्दे खाप के प्रस्तावों में शामिल हैं। भविष्य में इन पर कार्रवाई होगी।