मुजफ्फरनगर। बिजनौर खादर की 50 हजार बीघा जमीन पर लेखपालों के नेता शिवकुमार और उसके साथी भूमाफियाओं का राज चलता था। जमीन की खरीद-फरोख्त शिवकुमार के बिना संभव नहीं थी। हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के सैकड़ों लोग ऐसे हैं, जिन्होंने यहां जमीन खरीदी, मौके पर जमीन पर कब्जा किया और एक-दो साल बाद ही उनकी जमीन पर दूसरे का कब्जा हो गया। ऐसे कई प्रकरण एडीएम वित्त एवं राजस्व के सामने आए हैं। लगभग पांच अरब की गंगा खादर की जमीन पर एकतरफा शिवकुमार का ही सिक्का चलता रहा।
बिजनौर जिले के खादर के गंगा में मुजफ्फरनगर की तरफ 42 ऐसे गांव हैं, जिन्हें गैर आबाद गांव में शामिल किया हुआ है। इन्हीं के साथ मुजफ्फरनगर के दो गांव मजलिसपुर तौफीर और लुकादड़ी को भी इन्हीं गांवों की श्रेणी में रखा गया है। गंगा की लगभग एक लाख बीघा जमीन ऐसी है, जिस पर खेती हो रही है। इनमें 50 हजार बीघा जमीन उन किसानों की है, जो इन 44 गैर आबाद गांवों में रहते हैं। 50 हजार बीघा जमीन ग्राम समाज और पट्टों की है। देश की आजादी के बाद से ही इस क्षेत्र में शिवकुमार और उनके पिता लेखपाल के रूप में यहां कार्यरत रहे हैं। गंगा खादर की जमीनों पर एकतरफा इन्हीं का कब्जा रहा है। नियमानुसार गांव की खतौनी छह साल बाद नई बनती है। जमीनों में घपलेबाजी करते हुए हर दो साल बाद ये नई खतौनी बनाते रहे। खादर की 50 हजार बीघा जमीन पर इन लोगों ने पहले अपने परिचितों के नाम पट्टे काटे। दस साल की निश्चित अवधि के बाद जमीन की बिक्री करा दी। वर्तमान में पशुचरान और ग्राम समाज की जमीन फर्जीवाड़ा कर इन्होंने बेच डाली। यही नहीं जो जमीन कागजों में गंगा के नाम से दर्ज है, उस पर भी पट्टे काट डाले। यह समस्त जमीन वर्तमान में लेखपाल शिवकुमार के साथी भूमाफियाओं के कब्जे में है। जिन लोगों ने यहां पट्टेदारों और किसानों से जमीन खरीदी उनमें बड़ी संख्या में ऐसे भी हैं, जिनका एक-दो साल ही जमीन पर कब्जा रह सका। जमीन का पैसा देने के बाद भी बड़ी संख्या में लोग जमीन पाने को भटक रहे हैं।
छह साल में नहीं हुआ सर्वे
मुजफ्फरनगर। जमीनों की घपलेबाजी रोकने को लेकर छह वर्ष पूर्व प्रदेश सरकार ने गंगा खादर के सभी 44 गैर आबाद गांवों का सर्वे कराने का निर्णय लिया था। इसके लिए 26 लेखपाल और 10 कानूनगो नियुक्त किए गए। छह साल पूरे होने के बाद भी सर्वे का काम पूरा नहीं हो पाया। अगर प्रत्येक गांव के रकबे का सर्वे पूरा हो जाता तो माफियाओं का खेल खत्म हो जाता।
लेखपाल का रहा आतंक : शर्मा
गंगा खादर में बिजनौर क्षेत्र की जमीनों पर लेखपाल शिवकुमार और उसके भूमाफिया साथियों का ही कब्जा है। इनकी मरजी के बिना यहां न कोई जमीन बेच सकता था और न ही खरीद सकता था। बाहरी राज्यों के जिन लोगों ने यहां जमीन खरीदी उनमें से बहुत से लोगों को इन्होंने ठगा है। ऐसी कई शिकायतें आई हैं, इन सबकी जांच की जा रही है।