मुजफ्फरनगर। किसानों के 159 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं करने वाली तितावी चीनी मिल पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। 36 करोड़ की चीनी बेचकर किसानों का भुगतान नहीं करने पर मिल मालिक सिद्धार्थ श्रीराम समेत चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है।
बकाया भुगतान को लेकर तितावी मिल क्षेत्र के किसान आंदोलन कर रहे हैं। मिल गेट पर भूख हड़ताल और आंदोलन चल रहा है। जिला गन्ना अधिकारी ओमप्रकाश यादव ने बताया भुगतान नहीं किए जाने पर फरवरी में तितावी मिल का चीनी स्टॉक बंधक बना लिया गया था। एसडीएम सदर, समिति सचिव और मिल के अध्यासी की देखरेख में चीनी की बिक्री कर इससे किसानों का 85 प्रतिशत भुगतान करना था। मिल ने चीनी तो बेच दी, लेकिन करीब 36 करोड़ रुपये का किसानों का भुगतान नहीं किया। पिछले पेराई सत्र का मिल पर 159 करोड़ रुपये बकाया है। जिलाधिकारी कौशलराज शर्मा की अनुमति के बाद जिला गन्ना अधिकारी की ओर से तितावी थाने में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7, गबन और अमानत में खयानत की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। मुकदमे में मिल मालिक सिद्धार्थ श्रीराम, अध्यासी पंकज उपाध्याय, उपाध्यक्ष बीबी मेहता और महाप्रबंधक लेखा डीसी पोपली को आरोपी बनाया गया है। यादव का कहना है कि चीनी बिक्री कर किसानों का भुगतान करने के बजाए मिल ने धन को अन्य मदों में खर्च कर दिया। प्रशासन ने इसे गबन माना है। मिल को किसानों के गन्ने से बनी चीनी की बिक्री कर सबसे पहले गन्ना मूल्य का भुगतान करना चाहिए था।
कितना बढ़ेगा दबाव?
पिछले वर्ष भी कई चीनी मिलों पर भुगतान नहीं होने पर मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन यह केवल फाइलों तक सिमटकर रह गया। पिछले वर्ष भी मंसूरपुर, भैसाना, खाईखेड़ी और तितावी चीनी मिल पर मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई।
बेच दी चीनी, भुगतान नहीं
भुगतान के लिए हंगामा होने पर प्रशासन ने तितावी मिल का स्टॉक बंधक बना लिया था। जिला गन्ना अधिकारी ओमप्रकाश यादव का कहना है कि स्टॉक बंधक होने के बावजूद मिल ने 36 करोड़ की चीनी बेच दी, लेकिन इससे किसानों का भुगतान नहीं किया गया, यही कारण है कि मिल के खिलाफ गबन और अमानत में खयानत की धाराओं में तितावी थाने में मामला दर्ज कराया गया है।