बिजनौर/कोतवालीदेहात। गांव उमरी की दो बहनों के आतंकियों के साथ संबंध उजागर होने के बाद पुलिस, पीएसी और अर्द्धसैनिक बलों ने पूरे गांव और जंगल में सर्च अभियान चलाया। गांव को सील कर पुलिस ने ग्रामीणों के खेतों व सड़क से गुजरते वाहनों की भी चेकिंग की। पुलिस को शक है कि आतंकवादी उमरी गांव या इसके आसपास ही छिपे हुए हैं।
गांव उमरी की दो शादीशुदा सगी बहनें मुहल्ला भाटान में आतंकियों के कमरे के ऊपर वाले कमरे में किराए पर रहती थीं। दोनों बहनों का आतंकियों से गहरा नाता था। एसटीएफ, एटीएस के दोनों बहनों को दबोचने के बाद पुलिस ने गांव के खेतों में कांबिंग की। एटीएस ने दोनों बहनों के पास से एक बैग भी बरामद किया है। इस बैग में क्या है, यह एटीएस अभी नहीं बता रही है। माना जा रहा है कि बैग में आतंकियों की कुछ सामग्री हाथ लग गई है। खुफिया एजेंसियों को पूरा यकीन है कि आतंकी गांव उमरी के जंगल में ही तीन दिन तक छिपे रहे। इस दौरान दोनों बहनों ने आतंकियों की पूरी मदद भी की। पुलिस ने गांव को चौतरफा से घेरकर कांबिंग की। कांबिंग के दौरान एक बाग में पुलिस को बाइक के टायरों के निशान मिले, जो सड़क पर आकर खत्म हो गए। पुलिस मान रही है कि बाइक से आतंकी ही बाग में आए होंगे। पुलिस ने जंगल में ट्यूबवेल पर बनी कोठरी को भी अच्छी तरह से खंगाला और खेतों में भी कांबिंग की। पुलिस ने गांव के पास से गुजर रहे वाहनों की भी तलाशी ली। इस दौरान डीआईजी गुलाब सिंह थाने में डेरा डाले रहे। समाचार लिखे जाने तक पुलिस व पीएसी बल ने गांव को सीज कर रखा था।
दोनों बहनें हैं शादीशुदा
कोतवालीदेहात। एटीएस, एसटीएफ द्वारा पकड़ी गईं दोनों बहनें शादीशुदा हैं। बड़ी बहन की शादी लगभग दस साल और छोटी की शादी सात साल पहले हुई थी। दोनों के पति सऊदी अरब में नौकरी करते हैं।
एटीएस, एसटीएफ ने संभाली ऑपरेशन की कमान
बिजनौर। आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन की कमान पूरी तरह एटीएस और एसटीएफ ने संभाल ली है। लोकल पुलिस को इससे दूर कर दिया गया है। पुलिस का कोई दखल अब इस अभियान में नहीं चल रहा है। विस्फोट होने के बाद पुलिस भी आतंकियों को खंगालने में लगी थी, लेकिन अब एटीएस, एसटीएफ ने पुलिस को इस अभियान में दखल देने से मना कर दिया है। यही वजह रही कि कई दिन से मशक्कत के बाद जहां लोकल पुलिस आतंकियों के दूसरे ठिकाने तक नहीं पहुंच र्पाई थी, एटीएस और एसटीएफ ने आतंकियों के दूसरे ठिकाने को ढूंढ लिया।
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दो बाइकों से घूमते थे आतंकी
बिजनौर। आतंकी एक नहीं बल्कि दो बाइकों से शहर में खुलेआम घूमते थे। काले रंग की जिस बाइक से आतंकी अपने झुलसे साथी को लेकर फरार हुए हैं, वह बाइक आतंकियों के मोहल्ला भाटान वाले कमरे पर रहती थी। मोहल्ला जाटान के जिस मकान में विस्फोट हुआ वहां आतंकी सिल्वर कलर की बाइक रखते थे। मोहल्ले वालों ने आतंकियों को सिल्वर कलर की बाइक से घूमते देखा था।
आतंकियों ने आसपास घूमने के लिए पूरी तरह से इंतजाम कर रखे थे। मोहल्ला जाटान के जिस कमरे में विस्फोट हुआ, आधे आतंकी वहां और आधे मोहल्ला भाटान में किराए के मकान में रहते थे। आतंकियों के पास उनके कुछ और साथियों का आना जाना था। दोनों कमरों पर आतंकी खूब आते जाते थे। आतंकियों के पास शहर व आसपास के इलाकों में घूमने केलिए एक नहीं दो बाइक थीं। विस्फोट के बाद चिकित्सक के यहां से जिस काले रंग की बाइक से आतंकी अपने झुलसे साथी को ले गए, वह बाइक जून में मुरादाबाद से चोरी की गई थी। मोहल्ला जाटान वाले मकान पर आतंकियों के पास सिल्वर कलर की एक और बाइक थी। इस बाइक से ही आतंकी इस मकान पर आते जाते थे। मोहल्ले वालों ने सिल्वर कलर की बाइक इस्तेमाल करते आतंकियों को खूब देखा। यह बाइक आतंकियों ने कहां से चोरी की अब पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है। विस्फोट के बाद से बाइक नहीं मिली। सिल्वर कलर की बाइक आतंकी कहां खड़ी करते थे, किसी को नहीं मालूम।
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नेपाल भागने की फिराक में लगे हैं आतंकी
बिजनौर। विस्फोट होने के बाद फरार हुए आतंकी नेपाल जाने की फिराक में हैं। नेपाल आतंकियों के छिपने की सबसे मुफीद जगह है। आतंकी नेपाल भागने का रास्ता तलाश रहे हैं। एटीएस, एसटीएफ और खुफिया एजेंसी की किलेबंदी आतंकियों के मंसूबे कामयाब नहीं होने दे रही। उधर, सूत्रों का कहना है कि जल्द ही आतंकी पकडे़ जा सकते हैं।
मध्य प्रदेश की खंडवा जेल से फरार होने के बाद आतंकी नेपाल में जा कर छिपे थे। खुफिया सूत्रों केमुताबिक बिजनौर से फरार होने के बाद सभी आतंक ी नेपाल जाने की फिराक में जुटे हैं। बिजनौर से तीन-तीन आतंकी चिकित्सक के क्लीनिक से दो टुकड़ियों में बंट कर निकले। तीन आतंकी ऊमरी में जा छिपे तो बाकी कहीं और। चिकित्सक के यहां से बाइक पर जाते तीन आतंकी अपने पैदल तीन साथियों को बता कर जा रहे थे कि उन्हें अब कहां, कैसे मिलना है। इसकेबाद ये आतंकी बिजनौर से निकल गए। दो दिन बाद आतंकी उमरी गांव से निकले हैं। एटीएस, एसटीएफ फरार आतंकियों का पूरी ताकत के साथ खंगालने में जुटी है। अफसरों का दावा है कि आतंकी अभी भी बिजनौर जिले में हैं और जल्दी ही पकड़े जाएंगे।
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लीलो देवी को मुगालते में रखते थे आतंकी
बिजनौर। लीलो देवी ने 1500 रुपये माह पर आतंकियों को मकान किराए पर दे रखा था। 300 रुपये माह बिजली के अलग से लेती थी। लीलो का कोई पुत्र घर पर नहीं आता था। लीलो देवी को आतंकियों ने कभी यह अहसास होने का मौका नहीं दिया कि वे आतंकी हैं। मोहल्ले वालों के मुताबिक अब लीलो देवी बता रही है कि अगर विस्फोटक सामग्री पीसने केदौरान वह आतंकियों के कमरे के पास चली जाती थी तो आतंकी कमरे से बाहर आकर उन्हें खुश करने में जुट जाते थे। अम्मा कह कर उन्हें पुकारते थे। एक आतंकी वृद्धा के साथ ऐसे रहता था जैसे उसका पुत्र हो। वृद्धा ने एक बार मीट बनाने पर ऐतराज किया तो एक आतंकी ने खुद को पंडित और दूसर ेने चौहान बताया। अब वृद्धा मोहल्ले वालों को आतंकियों की छोटी छोटी बात बता रही है।
नगीना से भी एक किराएदार को उठाया
नगीना। खुफिया टीम ने मोहल्ला विश्नोई सराय में इल्यास के मकान पर किराए पर रहने वाले एक व्यक्ति को बृहस्पतिवार को पूछताछ के लिए उठा लिया है। यह व्यक्ति अपने परिवार के साथ 15-20 दिनों से रह रहा था। टीम इस व्यक्ति को उठा कर अपने साथ ले गई है। शहर में चर्चा है कि कहीं नगीना में भी तो आतंकी नहीं छिपे हैं।