शामली। श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति की ओर से पर्यूषण पर्व के उपलक्ष्य में श्री 1008 कल्पद्रुम महामंडल विधान और विश्व शांति यज्ञ के दूसरे दिन जैन पुण्य सागर महाराज ने मंगल प्रवचन किया। उन्होंने कहा कि उत्तम मार्दव धर्म अहंकार का प्रतीक है।
रविवार को श्री दिगंबर जैन धर्मशाला में जैन मुनि नमोत्सु सागर के सानिध्य में पूजा अर्चना हुई। संगीतकार कन्हैया लाल जैन ने भजनों की प्रस्तुति दी। सवारिया पारसनाथ शिखर परभला विराजा जी, मधुबन के मंदिरों में भगवान बरस रहे है पारस प्रभु चरणों में सोना बरस रहा है, आदि भजन प्रस्तुत करके इंद्र - इंद्राणियों को झूमने पर मजबूर कर दिया। पुण्य सागर महाराज ने कहा कि मौजूदा दौर में जीव अहंकार में चूर होकर तन, मन, धन से सुखी होकर भी दुखी है। जीव के अंदर अंहकार छिपा है। जीव को जीवन जीने के दो तरीके है। सारी दुनिया को जीव नौकर समझते है, और अपने को मालिक मानते है। जीव को जो सम्मान मिलता है वह पुण्य पात्रों से मिलता है। जीव के अंदर श्रेष्ठता नहीं तो आपके अंदर मार्दव धर्म नही है। ललित जैन, अनिल जैन, कमल जैन, मुकेश, उमेश जैन, नवीन जैन, सुशील जैन, पंकज जैन, सचिन जैन, दीपक जैन, राजीव जैन, अरविंद जैन, वीरेश जैन मौजूद रहे।