मुजफ्फरनगर। संतोष तो दुनिया से चली गई, रेलवे भी जांच करता रहे, मैं जानता हूं कुछ नहीं होगा। पूरी कार्रवाई सिर्फ रस्म अदायगी है। रेलवे के कमांडेंट के बयान ने हमारे दुख को दोगुना कर दिया। मुआवजा लेकर मैं क्या करूंगा।
यह कहना है शताब्दी ट्रेन से धकेले गए राजेश्वर सिंह का। बुधवार को कुछ पुलिस कर्मियों ने राजेश्वर और उनकी पत्नी संतोष को ट्रेन से धक्का दे दिया था। संतोष की मौके पर ही मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद गुरुवार को मृतका का अंतिम संस्कार कर दिया गया। राजेश्वर का परिवार शहर के रुड़की रोड स्थित जनकपुरी में रहता है। शताब्दी ट्रेन में हुए हादसे के बारे में राजेश्वर कहते हैं कि प्लेटफार्म एक पर शताब्दी खड़ी थी, मैंने इंक्वायरी विंडो पर पूछा कि क्या यह ट्रेन सहारनपुर जा रही है। जवाब हां में मिला तो हम जल्दी से ट्रेन में चढ़ गए। अभी हम दरवाजे पर ही थे कि अचानक दो सिपाही आए और पत्नी को धकेलते हुए नीचे उतरने के लिए कहा। चूंकि संतोष आगे थी और मैं पायदान पर था। वह संभल नहीं पाई, दरवाजे का हैंडिल हाथ से फिसल गया। मैंने संभालने की कोशिश की, लेकिन पलभर में सबकुछ छिन गया। सहायक कमांडेंट जेपी मीणा के मुआवजे के लिए ऐसा करने के बयान ने हमारे दुख को और बढ़ा दिया है। मुआवजा लेकर मुझे क्या करना है। जांच के बारे में राजेश्वर कहते हैं कि तफ्तीश होती रहेगी, किसी का कुछ नहीं बिगड़ना। संतोष तो अब वापस नहीं आएगी।
एसपी ने दर्ज किए बयान
मुजफ्फरनगर। जीआरपी मुरादाबाद मंडल के एसपी रामकृष्ण भारद्वाज पीड़ित परिवार के घर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। घटना के एकमात्र चश्मदीद पति राजेश्वर के बयान दर्ज किए गए। एसपी ने राजेश्वर से सवाल किया, क्या दोषी पुलिसकर्मियों को पहचान सकते हैं? इस पर मृतका के पति ने कहा कि उनकी नजर सिर्फ नेमप्लेट पर गई थी, चेहरा ठीक से नहीं देख पाया। राजेश्वर के बयान दर्ज कर एसपी वापस लौट गए।
गिरफ्तारी के लिए टीम भेजी
मुजफ्फरनगर। जीआरपी एसपी आरके भारद्वाज ने मौका ए वारदात का निरीक्षण किया। उन्होंने आसपास के वेंडरों से भी पूछताछ की। एसपी को किसी ने सटीक जानकारी नहीं दी। सभी ने यही कहा कि शोर मचने के बाद ही उन्हें घटना की जानकारी हुई। एसपी ने दोषी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन किया। जीआरपी एसओ पंकज लवानिया ने बताया कि दारोगा रामचंद्र और सिपाही सुभाष की गिरफ्तारी के लिए टीम रवाना हो गई है।