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वाणिज्य कर विभाग ने थमाया 98 लाख का नोटिस, फर्म की ओर से सीए समेत दो के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज    

Fri, 04 Aug 2017 12:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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करेंसी। - फोटो : AmarUjala
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जालसाजी कर कुछ लोगों ने एक फर्म के नाम पर करोड़ों का कारोबार कर लिया। दो साल बाद वाणिज्य कर विभाग ने फर्म मालिकों से टैक्स जमा कराने के लिए कहा, तो उनमें खलबली मच गई।  इसकी जांच-पड़ताल की गई तो लगातार फर्म के नाम से बिजनेस किया जाना पाया गया। बुधवार को पीड़ितों की ओर से नईमंडी थाने में सीए समेत दो लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और साइबर एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस मामले की जांच-पड़ताल करने में जुट गई है।  
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शहर के मोहल्ला कंबलवाला निवासी अमित वर्मा पुत्र वीरसिंह वर्मा और उसके साथी गौरव चाहल ने मिलकर जनवरी 2015 में रिब्स इंटरप्राइजेस के नाम से फर्म खोली थी। दोनों साथियों ने किसी कारण से फर्म का इस्तेमाल नहीं किया। नई मंडी थाने में गौरव चाहल की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में आरोप है कि 21 जून 2017 को वाणिज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर वीपी सिंह ने रिब्स इंटरप्राइजेस के नाम से दो करोड़ रुपये का माल दूसरे राज्य से आयात कर बेचने के बारे में पूछताछ की।

इसके अलावा भी बोगस बिलों के आधार पर खरीद-फरोख्त कर तीन करोड़ का बिजनेस दर्शाया गया है। वाणिज्य कर विभाग ने खरीदे और बेचे गए माल का कोई टैक्स जमा नहीं होने की जानकारी दी। फर्म मालिकों पर वाणिज्य कर विभाग ने 98 लाख रुपये का टैक्स जुर्माना लगाया है। पीड़ित फर्म मालिक ने कोई बिजनेस नहीं होने के साक्ष्य दिए। इसके बाद मामले की वाणिज्यकर विभाग और पीड़ित फर्म मालिकों ने जांच-पड़ताल कराई तो बिजनेस करने में दो लोगों के नाम सामने आए।
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फर्म के मालिक अमित और गौरव चाहल का आरोप है कि उक्त दोनों ने अपने साथियों के साथ मिलकर उनकी फर्म का गलत से तरीके से इस्तेमाल किया। साथ ही फर्म के नाम से राजस्व को हानि पहुंचाई है। उक्त लोगों ने फर्जी दस्तावेज लगाकर उनकी फर्म से करोड़ों रुपये का बिजनेस किया है। बुधवार को नईमंडी थाने में गौरव चाहल की ओर से मोहित संगल निवासी लद्दावाला और सीए वासुदेव सिसौदिया निवासी कृष्णा नगर मथुरा के खिलाफ धोखाधड़ी, साइबर एक्ट के साथ आईपीसी की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराया गया है। पुलिस मामले की जांच-पड़ताल में जुट गई है।  

फर्म की होगी जांच, टैक्स देना पड़ेगा       
वाणिज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर बीपी सिंह ने बताया कि रिब्स इंटरप्राइसेज पर कारोबार करने के बाद लाखों रुपये का टैक्स बनता है। यह राजस्व है, जो फर्म को देना पड़ेगा। इस मामले को लेकर रिब्स इंटरप्राइसेज के स्वामियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज है। उन्होंने बताया कि जिले में व्यापारी टैक्स से बचने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। विभाग के रडार पर अन्य फर्में भी हैं, जिनकी जांच-पड़ताल कराई जा रही है। हालांकि फिलहाल जीएसटी लगने के कारण टीम कहीं भी छापेमारी नहीं कर रही है, लेकिन समय आने पर व्यापारियों से प्रत्येक लेनदेन और कारोबार का ब्यौरा लिया जाएगा।  
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