मां के जीवट से लेफ्टिनेंट बना हितेश
मुजफ्फरनगर। जीवट से भरी एक मां ने बेटे को लेफ्टिनेंट बना कर कारगिल शहीद पति को सच्ची श्रद्धांजलि दी है। शहीद वचन सिंह की शहादत के वक्त उसके जुड़वा बेटों की उम्र साढ़े पांच साल थी। जिंदगी की विषम परिस्थितियों में वीर सैनिक की पत्नी ने जो दृढ़ संकल्प लिया था, उसे आईएमए की पासिंग आउट परेड में पूरा होता देख लिया। लेफ्टिनेंट हितेश उसी राजपूताना रायफल्स में कमांडिंग अफसर बने है, जिस बटालियन में उनके पिता लांस नायक थे।
जून माह की तारीख शहीद वचन सिंह की पत्नी कामेश बाला के दुख और सुख से जुड़ गई है। कारगिल युद्ध में बेटले ऑफ तोलोलिंग चोटी पर 13 जून 1999 को उनके पति ने देश की रक्षा को प्राणों की आहुति दी थी। 19 साल बाद नौ जून को बेटा हितेश सेना में लेफ्टिनेंट बन गया है। आईएमए देहरादून की पासिंग आउट परेड में गर्व से पुत्र को देख वो भावुक हो गई। आंखों से आंसू बहने लगे, तो हितेश ने मां को उनके हौसले के लिए सेल्यूट किया। शहर की आदर्श कालोनी में घर पर खुशियों का माहौल है। कामेश बाला ने न केवल साढ़े पांच साल के जुड़वा बेटों हितेश और हेमंत को पढ़ाने का लक्ष्य बनाया, बल्कि संकल्प के मुताबिक आर्मी में अफसर बनाने का सपना भी पूरा किया। हितेश ने राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल चेल, शिमला हिल्स से दसवीं और कर्नाटक के बेलगांव स्थित आर्मी स्कूल से 12 वीं उतीर्ण की। मां ने बचपन से ही हितेश को अपना सपना बता दिया था। डीयू के श्रीराम कॉलेज से उसने बीकॉम ऑनर्स किया। हितेश बताते हैं कि इंटर के बाद एनडीए की परीक्षा दी। लिखित एग्जाम में पास हो गए, मगर इंटरव्यू को क्रेक नहीं कर पाए। वर्ष 2016 सीडीएस में कामयाबी मिली। लेफ्टिनेंट का श्रेय मां को है। पिता वचन सिंह की राजपूताना रायफल्स के कमांडिंग अफसर एमबी रविंद्रचंद्रन से मिलने की इच्छा थी, मगर दुर्भाग्यवश उनकी हार्टअटैक से मौत हो गई। क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद, लाल बहादुर शास्त्री, अटलबिहारी वाजपेयी, परमवीर चक्र विजेता शैतान सिंह और गुरुवचन सिंह के व्यक्तित्व से उन्हें प्रेरणा मिलती है। हितेश का छोटा भाई हेमंत स्नातक की पढ़ाई कर रहा है।
स्मृति को नमन, समाधि पर पुष्पांजलि
मुजफ्फरनगर। लेफ्टिनेंट हितेश और उनकी मां कामेश बाला ने शहर में शहीद वचन सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनकी स्मृति को नमन किया। एसपी सिटी ओमवीर सिंह, पूर्व प्रधान चरण सिंह आदि मौजूद रहे। बाद में पचेंडा कलां गांव में शहीद के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। हितेश ने वृद्ध बाबा महावीर सिंह से आशीर्वाद लिया।